
उमरिया, 10 अक्टूबर (Udaipur Kiran) । आज हम आपको ऐसे ब्रिलियेंन्ट व्यक्ति के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी योग्यता सुनकर आप भी चौंक जायेंगे लेकिन उस व्यक्ति की बदकिस्मती यह रही कि न्यायालय ने उसकी योग्यता का लोहा न मानकर जेल भेज दिया।
मामला है जिले के ग्राम चिल्हारी निवासी अखिलेश्वर नाथ द्विवेदी पुत्र सम्पत प्रसाद द्विवेदी का जिसके बारे में जानकारी देते हुए ग्राम पलझा निवासी गोविन्द प्रसाद तिवारी ने बताया कि अखिलेश्वर नाथ की शिक्षा विभाग में वर्ग 1 के पद पर नियुक्ति तत्कालीन शहडोल जिले के जिला पंचायत शहडोल द्वारा वर्ष 1998 में हुई थी और इनकी प्रथम पदस्थापना हायर सेकंडरी मानपुर में अर्थशास्त्र के व्याख्याता के पद पर हुई, उसके बाद वर्ष 1998 में ही उमरिया जिला बनने के बाद इनको कुछ शंका हुई तो ये अपना स्थानांतरण अमरपुर हायर सेकंडरी स्कूल करवा लिया, लेकिन इनको वहां भी ठीक नही लगा तो ये अपना स्थानांतरण कटनी जिले के नगर परिषद सिनगौड़ी हायर सेकंडरी स्कूल में करवा लिया। बाद में पदोन्नति का भी लाभ लिए और प्रभारी प्राचार्य के प्रभार में आ गए उसके बाद इन्होंने अपना स्थानांतरण हायर सेकंडरी स्कूल डोकरिया करवा लिए और वहां प्रभारी प्राचार्य के पद पर विराजमान रहे।
अब इनकी डिग्रियों और टैलेन्ट के बारे में भी जान लीजिए ये वर्ष 1994 में बीएससी की डिग्री झांसी बुंदेलखंड से प्राप्त किये वर्ष 1995 में बीएड की डिग्री बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से प्राप्त कर लिए इतना ही नही वर्ष 1996 में वह भी माह दिसंबर में उस्मानिया हैदराबाद से एमए अर्थशास्त्र प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण कर डिग्री ले लिए। इतनी योग्यता और 2 वर्ष में बीएससी, बीएड और एमए की डिग्री देख कर फर्जीवाड़े की शंका होने पर गोविन्द प्रसाद तिवारी ने 31 दिसंबर 2012 को उमरिया जिले के कलेक्टर, डीईओ, सीईओ जिला पंचायत को लिखित शिकायत देकर इनकी योग्यता एवं डिग्री देख कर शिकायत किये जिसमे कुछ नही हुआ तब आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो भोपाल से पत्र व्यवहार किये जिस पर तत्कालीन एसपी उमरिया के पास वहां से पत्र आने पर थाना इंदवार को जांच के लिए निर्देशित किया। उस जांच में इनकी सारी योग्यता और डिग्री फर्जी पाई गई जिस पर थाना इंदवार के तत्कालीन थाना प्रभारी देव करण डेहरिया द्वारा थाना इंदवार में दिनांक 28/11/2013 को अपराध क्रमांक 255/13 धारा 420, 467, 468, 471 आईपीसी के तहत प्रकरण पंजीबद्ध कर जांच शुरू किया गया और 20 अक्टूबर 2015 को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया गया।
शासकीय अधिवक्ता रचना गौतम बताईं की हर बिंदुओं पर सुनवाई करने के बाद 7 अक्टूबर को 9 वर्ष बाद जिला अपर सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार चौधरी द्वारा धारा 420, 467, 468 और 471 में सजा सुनाई जाकर जेल भेज दिया गया। न्यायालय द्वारा हर धाराओं में 5-5 वर्ष की सजा एवं 3-3 हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया है साथ ही जुर्माने की रकम अदा न करने पर 6 – 6 माह के सश्रम कारावास की सजा का भी आदेश जारी किया गया है। वहीं अभी तक शासन द्वारा दिये गए वेतन एवं अन्य देयकों की वसूली के भी आदेश दिए गए।
(Udaipur Kiran) / सुरेन्द्र त्रिपाठी
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