Assam

असम में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में गुणोत्सव की भूमिका महत्वपूर्ण: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने गुणोत्सव 2025 के परिणामों की घोषणा कार्यक्रम में लिया हिस्सा

– मुख्यमंत्री ने गुणोत्सव 2025 के परिणाम घोषणा कार्यक्रम में लिया हिस्सा- आरोहण पहल के तहत 4,320 छात्रों को बांटे टैबलेट – असम के समग्र शिक्षा को आईएसओ प्रमाणपत्र साैंपा

गुवाहाटी, 27 मार्च (Udaipur Kiran) । मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने आज श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां गुणोत्सव 2025 के परिणामों की घोषणा की गई। इसके अतिरिक्त गुणोत्सव 2024 में ए प्लस ग्रेड प्राप्त करने वाले विद्यालयों को 25-25 हजार रुपये का अनुदान दिया गया। साथ ही आरोहन पहल के तहत 4,320 छात्रों को टैबलेट वितरित किए गए और समग्र शिक्षा, असम को आईएसओ प्रमाणन साैंपा गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. सरमा ने असम की शैक्षिक प्रगति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि समग्र शिक्षा अभियान, असम भारत में पहला राज्य संचालित कार्यक्रम है जिसे भारतीय गुणवत्ता परिषद से आईएसओ प्रमाणन प्राप्त हुआ है। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू और मिशन निदेशक डॉ. ओम प्रकाश की सराहना की। उन्होंने वर्ष 2012 में शुरू किए गए शैक्षिक सुधारों, विशेष रूप से पारदर्शी, योग्यता-आधारित शिक्षक भर्ती प्रणाली की शुरूआत को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 में अपनी स्थापना के बाद से गुणोत्सव ने असम में शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसने अपना ध्यान विशुद्ध रूप से अकादमिक मूल्यांकन से हटाकर मानकों में पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करने पर केंद्रित कर दिया है।

डॉ. सरमा ने राज्य की शैक्षिक प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राज्य में ए प्लस ग्रेड स्कूलों की संख्या वर्ष 2017 में 6,307 से बढ़कर वर्ष 2025 में 13,300 हो गई, जबकि ए ग्रेड स्कूल 12,927 से बढ़कर 13,952 हो गए। निम्न श्रेणी के स्कूलों की संख्या में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई, बी ग्रेड स्कूल 13,636 से घटकर 4,243, सी ग्रेड 9,163 से घटकर 891 और डी ग्रेड 7,105 से घटकर 218 हो गए। राज्य की प्रगति में विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने वर्ष 2030 तक भारत के शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी स्थान हासिल करने के असम के लक्ष्य पूरा करने की उम्मीद जताई। गुणोत्सव 2025 के परिणामों की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवसागर ने राज्य में पहला स्थान हासिल किया, उसके बाद गोलाघाट और डिब्रूगढ़ का स्थान रहा। शिवसागर ने लगातार तीन वर्षों तक अपनी शीर्ष रैंक बनाए रखी, स्वच्छता रैंकिंग में गोलाघाट, कामरूप (मेट्रो) और जोरहाट ने शीर्ष स्थान प्राप्त किया।

उल्लेखनीय है कि पहली बार मूल्यांकन में छात्रों के सीखने के परिणाम शामिल किए गए, साथ ही पोर्टल पर रिपोर्ट कार्ड भी उपलब्ध कराए गए। उन्होंने प्रधानाध्यापकों से छात्रों के लाभ के लिए सीखने के परिणाम पुस्तिका का उपयोग करने का आग्रह किया।

इस माैके पर मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि आगामी विधानसभा चुनाव के कारण गुणोत्सव 2026 को मध्य वर्ष में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने शिक्षा विभाग को सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों से 20 प्रतिशत बाहरी मूल्यांकनकर्ताओं की नियुक्ति करने का निर्देश दिया और प्रतिबंधित स्थानांतरणों के साथ एकल-शिक्षक स्कूलों के लिए एक अलग कैडर बनाने का प्रस्ताव रखा। इसके अतिरिक्त, उन्होंने पूर्व शिक्षकों के दस-सदस्यीय आयोग की स्थापना की सिफारिश की, जो यह आकलन करेगा कि शैक्षणिक प्रगति को संस्थागत विस्तार या गुणात्मक सुधारों के माध्यम से मापा जाना चाहिए या नहीं। उन्होंने टीईटी-योग्य शिक्षकों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता को रेखांकित किया, भर्ती से पहले कम से कम आठ महीने का कक्षा अनुभव और नए शिक्षकों के लिए दो साल की परिवीक्षा अवधि की वकालत की। इसके अलावा, उन्होंने कम से कम 50 छात्रों वाले स्कूलों में प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति पर प्रकाश डाला और शिक्षा विभाग के भीतर योग्यता-आधारित पदोन्नति पर जोर दिया, ताकि समग्र शिक्षा में न्यूनतम दस साल का अनुभव रखने वाले शिक्षक प्रधानाध्यापक पदों के लिए योग्य हो सकें।

आज के कार्यक्रम में असम विधानसभा अध्यक्ष बिस्वजीत दैमारी, शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू, कृषि मंत्री अतुल बोरा और हथकरघा, कपड़ा और रेशम उत्पादन आदि मंत्री यूजी ब्रह्म आदि उपस्थित थे। इसके अतिरिक्त, उच्च शिक्षा विभाग के सचिव नारायण कोंवर, समग्र शिक्षा अभियान के मिशन निदेशक डॉ. ओम प्रकाश और शिक्षा विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

(Udaipur Kiran) / अरविन्द राय

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