
बीकानेर, 18 मार्च (Udaipur Kiran) । देश के प्रति निष्ठा और समर्पण हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। ये विचार आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम ने जिले के नोखा के मूलवास सिलवा स्थित नरसी विला में आयोजित होली मिलन समारोह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि संघ सम्पूर्ण समाज का संगठन है। सेवा कार्य ही संघ की पहचान है। जब भी समाज में किसी भी कारणवश सेवा की आवश्यकता होती है, स्वयंसेवक समाज के साथ मिलकर सेवा कार्य में जुट जाते हैं। सेवा भाव संघ की कार्य पद्धति से स्वतः स्वयंसेवक सीखते हैं। उन्होंने कहा कि देश लोकतंत्र और संविधान के अनुसार चलता है। वैचारिक मत भिन्नताएं हो सकती हैं किन्तु समाज में स्नेह रहना चाहिए, द्वेष नहीं। उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक समाज में समरसता बने इसके लिए कार्य करते है।
भामाशाह व उद्योगपति नरसी कुलरिया ने कहा कि देश में जन्मे प्रत्येक व्यक्ति को राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पण का भाव रखना ही सच्ची राष्ट्र सेवा है। राष्ट्र जैसे छोटे से शब्द में विशाल, असीमित और बहुआयामी अर्थ और कर्तव्य बोध का सार समाहित हैं। देश के प्रत्येक नागरिक को अपने राष्ट्र प्रगति के लिए आवश्यक होता है कि वह जिस दशा में है, जिस परिस्थिति में है, जहां है, जैसा है, सकारात्मक सोच के साथ अपना योगदान दे। हमारा राष्ट्र है तो हम हैं, हमारा कर्तव्य राष्ट्र की सुरक्षा एकता, सुंदरता और निर्माण होना चाहिए। प्रत्येक सुबह राष्ट्र निर्माण की सोच के साथ होनी चाहिए। कोई भी कार्य करने से पूर्व हमारे मन में राष्ट्रप्रेम की भावना होनी चाहिए।
इस अवसर पर उगमाराम कुलरिया, भंवर कुलरिया, कानाराम कुलरिया, शंकर कुलरिया, दीपक, लालचंद, राजेश कुलरिया, गणेशाराम सुथार, प्रेम कुलरिया, राधाकिशन, सोहनलाल, हरिराम, मांगीलाल धामू, छैलूदास साध, भैराराम सुथार, तिलोक नाई, मोडसिंह, महेंद्रसिंह, चम्पादास आदि उपस्थित रहे। इससे पहले भामाशाह व उद्योगपति नरसी कुलरिया के द्वारा नरसी विला में आगमन पर निम्बाराम का स्वागत अभिनंदन भी किया गया।
30 मार्च को हिंदू नव वर्ष मनाने की भी दी जानकारी
आरएसएस क्षेत्रीय प्रचारक निम्बाराम ने नरसी विला में उपस्थित ग्रामीणों को राजस्थान दिवस 30 मार्च के स्थान पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिंदू नववर्ष) के दिन मनाए जाने की घोषणा पर मुख्यमंत्री का आभार जताया। सभी को इसी दिन नववर्ष मनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हिंदू नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन का महत्व इसलिए ज्यादा है कि उस दिन ही ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी। भारत वर्ष में प्राचीन काल से चली आ रही काल गणना उसी दिन से प्रारंभ होती है। सम्राट विक्रमादित्य ने आक्रमणकारी शकों को पूर्ण रूप से पराजित कर भारत से निष्कासित किया और उसकी याद में विक्रम संवत प्रारंभ किया। उसी दिन स्वामी दयानंद ने आर्य समाज की स्थापना की थी और भगवान राम का राज्याभिषेक भी उसी दिन हुआ था। इसलिए सभी लोगों को हिंदू नववर्ष धूमधाम से मनाना चाहिए।
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(Udaipur Kiran) / राजीव
