हाई कोर्ट ने दिया एनआईए को भूमिका स्पष्ट करने का आदेश
मुंबई, 19 मार्च (हि.सं.)। कोरेगांव-भीमा हिंसा और शहरी नक्सलवाद मामले के आरोपियों में से एक प्रोफेसर आनंद तेलतुंबड़े ने अध्ययन के लिए विदेश जाने की अनुमति मांगी है। इस मामले में बांबे हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है। साथ ही याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दी है।
तेलतुंबडे ने अप्रैल और मई महीने में अध्ययन के लिए विदेश जाने की अनुमति देने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। न्यायाधीश अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की पीठ में बुधवार को याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई हुई। कोर्ट ने 18 नवंबर 2022 को तेलतुंबडे को जमानत दे दी थी। तेलतुंबडे को जमानत देते समय उन पर विदेश यात्रा पर प्रतिबंध लगाया गया था। इसलिए तेलतुंबडे ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याचिका में मुख्य मांग वीजा औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अपना पासपोर्ट वापस करने की है।
तेलतुंबडे की याचिका में उल्लेख किया गया है कि एम्स्टर्डम विश्वविद्यालय ने अप्रैल में आयोजित होने वाले चार सप्ताह के कार्यक्रम के लिए तेलतुंबडे का चयन किया है।, पीएचडी उम्मीदवारों के साथ वे सेमिनारों में भाग लेंगे और व्याख्यान भी देंगे। तेलतुंबडे को 16 अप्रैल को नीदरलैंड के लीडेन विश्वविद्यालय द्वारा व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा ब्रिटेन के नॉटिंघम ट्रेंट विश्वविद्यालय ने भी उन्हें मई के पहले दो सप्ताह के लिए स्कॉलर-इन-रेजिडेंस के रूप में आमंत्रित किया है। इसके अलावा ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय सहित ब्रिटेन के तीन अन्य विश्वविद्यालयों ने भी निमंत्रण भेजा है।
पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 और 1 जनवरी 2018 को कोरेगांव-भीमा में हुई हिंसा के सिलसिले में तेलतुंबडे को गिरफ्तार किया था। उन पर प्रतिबंधित संगठनों के साथ-साथ नक्सली संगठनों का भी सक्रिय सदस्य होने का आरोप है। आरोप है कि प्रतिबंधित संगठनों के लिए लोगों की भर्ती करने और धन इकट्ठा करने में भी वे शामिल थे। वे एल्गर परिषद कार्यक्रम में आमंत्रित लोगों में से एक थे। एनआईए का आरोप है कि उन्होंने उस समय भड़काऊ भाषण दिए थे। जुलाई 2021 में एनआईए की विशेष अदालत ने तेलतुंबडे की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हालांकि हाई कोर्ट ने उन्हें नवंबर 2022 में ज़मानत दे दी थी। सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें जमानत देने के हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा था।
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(Udaipur Kiran) / वी कुमार
