
-राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक ने दिए जरूरी टिप्सलखनऊ, 28 मार्च (Udaipur Kiran) । उत्तर प्रदेश में 01 अप्रैल से विशेष संचारी रोग अभियान शुरू होगा। अभियान की तैयारी की समीक्षा करने के लिए शुक्रवार को राज्य स्तरीय कार्यशाला लखनऊ में हुई। इसमें अभियान को सफल बनाने की रणनीति और कालाजार उन्मूलन कार्यक्रम की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में राज्य स्तरीय अधिकारियों के अलावा 18 जिलों के अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवेल ने कालाजार उन्मूलन के लिए विभिन्न रणनीतियों, प्रगति रिपोर्ट एवं आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने निर्देश दिया कि कालाजार उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे सर्वेक्षण, स्क्रीनिंग और उपचार की गति को तेज किया जाए तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में विशेष ध्यान दिया जाए।
मिशन निदेशक ने कहा कि कालाजार उन्मूलन के लिए सामुदायिक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। इस दिशा में प्रभावी जन-जागरूकता अभियान चलाने, शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लक्षित हस्तक्षेप करने तथा मल्टी-सेक्टोरल सहयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। उन्होंने प्रभावित जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और त्वरित उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निदेशक संचारी डॉ. मधु गैरोला ने बताया कि विशेष संचारी रोग अभियान में संचारी रोग जैसे डेंगू, मलेरिया, दिमागी बुखार आदि के साथ ही टीबी, कुष्ठ, कालाजार एवं फाइलेरिया के लक्षणयुक्त मरीजों को भी चिन्हित करने पर जोर रहेगा। अभियान के अंतर्गत ही 10 से 30 अप्रैल तक दस्तक अभियान चलाया जाएगा, जिसमें आशा व आगंनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर लोगों का आभा आईडी बनाने, डेंगू, मलेरिया, फाइलेरिया आदि संचारी रोगों के प्रति जागरूक करेंगी। उन्होंने सभी अधिकारियों को संचारी रोग नियंत्रण अभियान में समर्पित होकर कार्य करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि कालाजार को प्रदेश से पूर्ण रूप से समाप्त करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे।
राज्य कार्यक्रम अधिकारी कालाजार और फाइलेरिया डॉ. एके चौधरी ने कालाजार उन्मूलन के लिए अपनाई जा रही वर्तमान रणनीतियों, दवा वितरण व्यवस्था और बीमारी की निगरानी से संबंधित आंकड़ों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में कीटनाशक छिड़काव, रोगियों की त्वरित पहचान और उनके उपचार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। आजमगढ़, बलिया, बलरामपुर, बुलंदशहर, कुशीनगर, देवरिया, गाजीपुर, वाराणसी, भदोही, गोरखपुर, जौनपुर, सुल्तानपुर, मउ, गोंडा, बहराइच, महराजगंज, लखनऊ, खीरी कालाजार से प्रभावित जिले हैं।
(Udaipur Kiran) / बृजनंदन
