मुंबई, 10 मार्च (Udaipur Kiran) । फ्रांसीसी कंपनी सिस्ट्रा ने सोमवार को बांबे हाई कोर्ट को सूचित किया कि उसने मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमएमआरडीए) और महाराष्ट्र सरकार के अनुबंध को बढ़ाने से इनकार करने के फैसले के खिलाफ अपनी याचिका वापस ले ली है।
न्यायमूर्ति आलोक आराधे और न्यायमूर्ति भारती डांगरे की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई हुई। उस समय कंपनी ने अदालत को सूचित किया कि उसने याचिका वापस लेने का निर्णय लिया है। इस पर राज्य के महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने अदालत को बताया कि हमने कंपनी से याचिका वापस लेने को नहीं कहा है। हालांकि कंपनी ने कहा कि मामले की बारीकियों को समझा जाना चाहिए। अदालत ने कंपनी का अनुरोध स्वीकार कर लिया है। दरअसल सिस्ट्रा कंपनी ने एमएमआरडीए अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। कोर्ट ने अनुबंध रद्द करने के एमएमआरडीए के फैसले के खिलाफ कंपनी की याचिका को बरकरार रखा था। इसके बाद यह मामला चर्चा में आया। अदालत के फैसले के बाद फ्रांसीसी दूतावास ने हस्तक्षेप किया। इसके अलावा उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी आरोपों की जांच के आदेश दिए थे।
फ्रांसीसी कंपनी सिस्ट्रा को मुंबई मेट्रो लाइन 5, 6, 7ए, 9, 10 और 12 के लिए मुख्य सलाहकार नियुक्त किया गया था। इसके अलावा, कंपनी को मेट्रो-2ए और 7 के डिपो की डिजाइनिंग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। हालांकि एमएमआरडीए ने कंपनी के साथ अनुबंध रद्द कर दिया था और दावा किया था कि उसने नियामक मानदंडों का उल्लंघन किया है। कंपनी ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
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(Udaipur Kiran) / वी कुमार
