HEADLINES

राज्यसभा ने ‘वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक-2025’ पारित किया

राज्यसभा में मंगलवार को  'वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक, 2025' पर चर्चा का जवाब देते केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू

नई दिल्ली, 1 अप्रैल (Udaipur Kiran) । राज्यसभा ने मंगलवार को वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक-2025 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। इसका उद्देश्य देश के अंदर कुछ महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करना और एयरलाइनों एवं पट्टा देने वाले दोनों के लिए सुरक्षा बढ़ाना है। यह पिछली अनिश्चितताओं के बीच पट्टा उद्योग के लिए स्पष्टता और लाभ प्रदान करता है। यह भारत को वैश्विक विमानन मानकों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वायुयान वस्तुओं में हित संरक्षण विधेयक-2025 पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने कहा कि इस विधेयक पर भारत पहले ही हस्ताक्षर कर चुका है। इसके बाद सदन ने विधेयक को ध्वनिमत से पारित कर दिया। विपक्षी सदस्यों द्वारा लाए गए संशोधन प्रस्ताव खारिज कर दिए गए।

विधेयक पर चर्चा के जवाब में राममोहन नायडू ने इस बात पर जोर दिया कि यह कानून एयरलाइनों और लीज पर देने वाले दोनों के लिए सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार है, जो इस क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही अस्पष्टताओं को दूर करता है। इस विधेयक से लीज उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिसके लिए तत्काल कानूनी स्पष्टता की आवश्यकता है। यह विधेयक मोबाइल उपकरणों में अंतरराष्ट्रीय हितों पर कन्वेंशन और विमानों के लिए विशिष्ट केपटाउन प्रोटोकॉल सहित अंतरराष्ट्रीय समझौतों को लागू करता है। इसमें यह अनिवार्य किया गया है कि ऋणदाता किसी भी प्रकार का उपाय अपनाने से पहले नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को सूचित करे तथा चूक की स्थिति में एक व्यवस्थागत उपाय प्रस्तुत करे।

नागरिक उड्डयन मंत्री ने कहा कि 2014 में भारत में घरेलू यात्री बाजार 6.07 लाख था, जो पिछले 10 सालों में बढ़कर 2024 तक 10.63 करोड़ हो गया। इसी अवधि में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या 4.3 करोड़ से बढ़कर 6.68 करोड़ हो गई। विमानों की संख्या भी 359 से बढ़कर 840 हो गई है। देश में 2014 में 74 एयरपोर्ट थे, जो इस समय बढ़कर 159 हो गए हैं।

नायडू ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में नागरिक उड्डयन में हमने जिस तरह की प्रगति देखी है, वह कोई आसान काम नहीं था। यह एक दिन में हासिल नहीं हुआ, बल्कि लगातार प्रयासों से हासिल हुआ। यही कारण है कि आज हम इतनी उल्लेखनीय वृद्धि देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि कई बार एयरलाइनों के दिवालिया हो जाने पर कानूनी विवाद उत्पन्न हो जाता है। विमान खड़े कर दिए जाते हैं। इससे विमानन उद्योग को तो नुकसान होता ही है लेकिन जो पक्ष विमान पट्टे पर देता है, उसे खासतौर पर बड़ा नुकसान होता है। इसी मामले में स्पष्ट कानून की आवश्यकता को देखते हुए यह विधेयक लाया गया।

उन्होंने कहा कि इस अधिनियम को लागू करने से लीज़िंग लागत 8 से 10 प्रतिशत तक कम हो रही है। यह लागत अंततः यात्रियों तक पहुंचेगी और हवाई किराए पर भी इसका असर पड़ेगा। इससे दोनों पक्षों को सहूलियत मिलेगी। यही कारण है कि यह हमारे लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

————-

(Udaipur Kiran) / दधिबल यादव

Most Popular

To Top