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मानहानि मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का उपराज्यपाल वीके सक्सेना को नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट फाइल फोटो

नई दिल्ली, 27 मार्च (Udaipur Kiran) । दिल्ली हाई कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के नए गवाह को शामिल करने की याचिका पर सुनवाई करते हुए उपराज्यपाल वीके सक्सेना को नोटिस जारी किया है। यह याचिका 24 वर्ष पुराने मानहानि मामले से जुड़ी है, जिसमें सक्सेना पर गुजरात में एक गैर-सरकारी संगठन के प्रमुख रहते हुए पाटकर के खिलाफ आपत्तिजनक विज्ञापन प्रकाशित करने का आरोप है। जस्टिस शलिंदर कौर ने मामले की अगली सुनवाई 20 मई को करने का आदेश दिया।

साकेत कोर्ट ने 18 मार्च को पाटकर की ओर से अतिरिक्त गवाहों को समन करने की अर्जी खारिज कर दी है। साकेत कोर्ट ने कहा था कि ये मामला 24 साल पुराना है और मेधा पाटकर की ओर से दिए गए सभी गवाहों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं। कोर्ट ने कहा था कि मेधा पाटकर ने भले ही अतिरिक्त गवाहों के बयान दर्ज करने की मांग की है लेकिन अर्जी में किस गवाह के बयान दर्ज कराना चाहती हैं, इसका उल्लेख तक नहीं है और वो भी इतने साल बीतने के बाद। यहां तक कि 24 सालों के ट्रायल के दौरान किसी नए गवाह के नाम का उल्लेख भी कहीं नहीं आया है। ऐसे में शिकायतकर्ता की अर्जी सही प्रतीत नहीं होती है।

मेधा पाटकर ने दिल्ली के उपराज्यपाल एवं खादी ग्रामोद्योग निगम के पूर्व चेयरमैन वीके सक्सेना के खिलाफ मानहानि का केस दायर किया है। ये केस जब दायर किया गया था उस समय सक्सेना नेशनल काउंसिल फॉर सिविल लिबर्टीज के अध्यक्ष थे। उल्लेखनीय है कि सक्सेना की ओर से दायर एक आपराधिक मानहानि के मामले में मेधा पाटकर को साकेत के मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सजा सुनाई है।

(Udaipur Kiran) /संजय

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(Udaipur Kiran) / वीरेन्द्र सिंह

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