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मथुरा और वाराणसी की मस्जिदें हिंदुओं को सौंप देना चाहिएः के.के. मोहम्‍मद

हिन्दुओ को मथुरा वाराणसी की मस्जिदें सौप दें मुस्लिम

उज्जैन, 10 मार्च (Udaipur Kiran) । अयोध्या में पुरातात्विक विभाग की खुदाई में स्पष्ट रूप से मस्जिद के नीचे मंदिर की उपस्थिति के प्रमाण भारत के सर्वोच्च न्यायालय में प्रस्तुत करने वाले भारतीय पुरातत्वविद् के.के. मोहम्मद सोमवार को पं. सूर्यनारायण व्यास संकुल, कालिदास संस्कृत अकादेमी परिसर में मीडिया से संवाद कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मथुरा और वाराणसी में मंदिर तोड़कर मस्जिद बनाई गई थीं। ऐसे में मथुरा और वाराणसी की मस्जिदें हिंदुओं को सौंप देना चाहिए।

उन्‍होंने कहा कि यदि यह हो गया तो हिन्‍दू नरम पड़ेंगे ओर देश अफगानिस्तान एवं सीरिया की तरह गृह युद्ध से बच जाएगा अन्‍यथा देश गृह युद्ध की आग में फंस जाएगा। अपनी बेबाक शैली में मीडिया के प्रश्नों का उत्तर देते हुए के.के. मोहम्मद ने कहा कि 12वीं शताब्दी में निर्मित श्रीराम मंदिर के अनेकों पिल्लर्स मस्जिद के नीचे पाए जाने के बाद अयोध्या का मामला सबूत के साथ न्यायालय में रखा गया तो न्यायालय ने हिन्‍दू भावना के हक में फैसला दिया और मस्जिद के लिए पांच गुना जमीन दूसरी जगह दे दी गई।

उन्‍होंने कहा कि इसी प्रकार मुस्लिमों को समझ लेना चाहिए कि मथुरा और वाराणसी में जो मस्जिद हैं, वे हिंदू मंदिरों को तोड़कर बनाई गई थीं। उसके सबूत भी एकत्रित हो गए हैं। मैंने स्वयं पुरातत्वविद् के नाते अंदर जाकर देखा है। ऐसे में मुस्लिमों को चाहिए कि वे ये दोनों मस्जिद हिंदुओं को सौप दें। हिंदू बस इतना ध्यान रखें कि इन दोनों मस्जिदों को लेने के बाद और मांग करना बंद कर दें। मुस्लिम यह मान लें कि जो गलतियां हो गई थीं, उसका अहसास है और बदले में मथुरा तथा वाराणसी की दो मस्जिदें हिंदुओं को सौप दी गई हैं। वहीं, हिंदू भी यह मान लें कि अब मामला समाप्त हो गया है। यदि यह हो गया तो ठीक, वरना देश में गृह युद्ध होने से कोई नहीं रोक सकेगा।

के.के. मोहम्मद ने कहा कि मैं अकेला मुस्लिम हूं, जिसने मजिस्दों के नीचे जाकर हिंदू मंदिरों के अवशेष देखे। औरंगजेब के समय लिखी गई पुस्तक में भी स्पष्ट लिखा हुआ है कि मंदिरों को तोड़ा गया और उसी सामग्री से मस्जिदों का निर्माण किया गया। मुस्लिमों में भी ऐसे लोग हैं जो यह मानते हैं कि उस समय गलतियां हुईं। लेकिन इन गलतियों को सुधारने के लिए जब समय आया है तो सभी मुस्लिमों को एकमत होना होगा। उन्‍होंने कहा कि इस देश में सदियों से हिंदू ओर मुसलमान साथ में रहते आ रहे हैं। यदि ऐसा नहीं हुआ होता तो भारत कभी का अफगानिस्तान या सीरिया बन गया होता। मुस्लिम होने के नाते यह मेरा व्यक्तिगत बयान है कि हमें भविष्य में गृह युद्ध की ओर नहीं जाना चाहिए।

भारतीय पुरातत्वविद् मोहम्‍मद का कहना है कि अब यह सब संभव नहीं है कि आप मुस्लिमों को देश से निकाल दें। इसके अलावा प्रतिबंधित पीएफआई की बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब वे अयोध्या के राम मंदिर की बात कर रहे थे, बावरी मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाया गया है, यह बात रख रहे थे, तब उन पर केरल में प्रतिबंधित पीएफआई के लोगों ने बहुत दबाव बनाया। मैं उस वक्त पहरे में रहता था। जब से पीएफआई पर प्रतिबंध लगा है, मैं रातों को सुकून से सो रहा हूं। वहीं, उनका कहना था कि संभल वाला मामला इसीलिए नहीं संभला क्‍योंकि दोनों पक्षों के बीच मनमुटाव है। इस मीडिया संवाद के वक्‍त विक्रम विवि के कुलगुरू प्रो.अर्पण भारद्वाज एवं कवि दिनेश दिग्गज भी उपस्थित थे।

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(Udaipur Kiran) / ललित ज्‍वेल

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