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मृतक आश्रित का मेडिकल बिल भुगतान रोका नहीं जा सकता : हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट

प्रयागराज, 26 मार्च (Udaipur Kiran) । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा कि मृतक कर्मचारी के आश्रितों को परिसीमा के आधार पर मेडिकल बिलों के भुगतान से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। जहां सेवा के आकस्मिक लाभ की पात्रता है, वहां कानून में देरी और सीमा के आधार पर उन्हें अस्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।

प्रयागराज की याची मोमिना बेगम के शौहर की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई। शौहर के चिकित्सा बिलों के भुगतान लिए याची ने सम्बंधित विभाग में आवेदन किया। जिसे यह कह कर खारिज कर दिया कि बिल समय सीमा के बाद प्रस्तुत किया गया है। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

याची के अधिवक्ता का कहना था कि याची शौहर की मौत से सदमे में थी। ठीक होने के बाद ही उसने प्राधिकरण से सम्पर्क किया। ऐसे में समय सीमा के आधार पर उसका आवेदन खारिज नहीं किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि याची के दावे को निर्धारित नियमों के अनुसार 90 दिन के भीतर दाखिल नहीं किए जाने के आधार पर खारिज कर दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी की इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उसकी पत्नी-उत्तराधिकारियों को देरी के आधार पर परेशान नहीं किया जाना चाहिए। कर्मचारी के जीवित रहने पर देरी के नियम को सख्ती से लागू किया जा सकता है। लेकिन वारिसों के मामले में जहां कर्मचारी की इलाज के दौरान मृत्यु हो जाती है, ऐसे नियमों को लागू नहीं किया जाना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि दावों के लिए 90 दिन की अवधि निर्धारित करने वाला प्रावधान निर्देश प्रकृति का है। ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो उक्त अवधि के बाद किए गए सभी दावों को अनिवार्य रूप से रोकता हो। कोर्ट ने याची को मेडिकल बिल फिर से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और सम्बंधित प्राधिकारी को कानून के अनुसार बिलों का निस्तारण करने का निर्देश दिया।

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(Udaipur Kiran) / रामानंद पांडे

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