
पटना, 1 अप्रैल (Udaipur Kiran) ।
लोक आस्था के महापर्व चैती छठ पूजा की आज मंगलवार से नहाय-खाय के साथ शुरु हो गई। नहाय-खाय में व्रती स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं और चने की दाल, कद्दू की सब्जी, और चावल ग्रहण करते हैं। इस दिन घर की साफ-सफाई और शुद्धिकरण पर जोर दिया जाता है।
खरना को दूसरे दिन व्रती दिन भर उपवास रखकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस प्रसाद को पूरे समुदाय में बांटा जाता है। तीसरे दिन संध्या अर्घ्य दिया जाता है। यह मुख्य दिन होता है। श्रद्धालु नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस दौरान बांस की टोकरी में ठेकुआ, फल और गन्ना रखकर विशेष भागवान भास्कर की पूजा की जाती है। अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है। इसके बाद प्रसाद वितरण और पारंपरिक गीतों के साथ उत्सव मनाया जाता है।
पटना जिला प्रशासन की ओर से लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा को देखते हुए 41 गंगा घाट और सात तालाबों को तैयार किया गया है। जिला प्रशासन और नगर निगम की ओर से घाटों की सफाई और एप्रोच रोड के साथ गंगा नदी में बेरीकेडिंग, शुद्ध पेजल, लाइटिंग, शौचालय और चेंजिंग रूम की व्यवस्था की गई है। गंगा घाटों पर मेडिकल टीम की भी प्रतिनियुक्ति की गई है। गंगा नदी में लगातार एसडीआरएफ की टीम के द्वारा पेट्रोलिंग की जा रही है। जिला प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि गंगा नदी में किए गए बेरीकेडिंग को पर ना करें।
गंगा घाटों पर दिखाई दी काफी भीड़
नहाय-खाय के दिन पटना के गंगा घाटों पर छठव्रतियों की काफी भीड़ देखने को मिली । बड़ी संख्या में छठव्रती ने गंगा में डुबकी लगाई और गंगाजल अपने सिर पर रखकर घर ले गए। राजधानी पटना समेत बिहार के दरभंगा, भागलपुर, मुजफ्फरपुर, गया जैसे शहरों में गंगा और अन्य नदियों के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ रही । यह पर्व सूर्य देवता और छठी मईया की उपासना का प्रतीक है, जो न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक एकता का भी परिचय देता है।
छठ पूजा मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाने वाला चार दिवसीय महापर्व है। छठव्रती ने बताया कि यह साल में दो बार-चैत्र माह में चैती छठ और कार्तिक माह में कार्तिकी छठ के रूप में मनाया जाता है। चैती छठ चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को होती है, जो आमतौर पर मार्च-अप्रैल में पड़ती है।
पौराणीक मान्यताओं के मुताबिक महाभारत काल में द्रौपदी ने पांडवों की खोई हुई राजसत्ता वापस पाने और संतान प्राप्ति के लिए छठ व्रत किया था। एक अन्य कथा के अनुसार, भगवान राम और सीता ने अयोध्या लौटने पर कार्तिक मास में छठ पूजा की थी। स्थानीय लोक कथाओं में छठी मईया को सूर्य देव की बहन और संतान रक्षक देवी माना गया है। इस प्रकार, यह पर्व प्रकृति पूजा और स्त्री-शक्ति के सम्मान का भी प्रतीक है।
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(Udaipur Kiran) / गोविंद चौधरी
