
बिजनौर,20 मार्च (Udaipur Kiran) | जनपद के नजीबाबाद तहसील के क्षेत्र उत्तराखंड से लगे क्षेत्र कोडि़या में अरबों रुपए की वन भूमि एवं वन संपदा को खुर्द बुर्ज करने के बारे में जिलाधिकारी को शिकायत करते हुए जांच कराई जाने की मांग की गई है |
शिकायतकर्ता बिजनौर निवासी नरेंद्र कुमार ने शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि कोटद्वार से लगी वन ग्राम खसरा नंबर 20 क्षेत्रफल 8.599 हेक्टर है ,यह भूमि मेरठ पौड़ी राष्ट्रीय मार्ग पर स्थित है जिसे आरक्षित वन भूमि के खसरा संख्या 20 को लेखपाल ने अपनी सुविधा अनुसार 20/2 क्षेत्रफल 3.7 94 हेक्टेयर को रिजर्व फॉरेस्ट एवं शेष भूमि को अपनी सुविधा अनुसार 20/1 क्षेत्रफल 4.805 हेक्टेयर को प्राइवेट व्यक्तियों के नाम कर दिया है। यह परिवर्तन अवैध रूप से नियमों को ताक पर रखते हुए किया गया है, शिकायतकर्ता का आरोप है की वन आरक्षित भूमि के क्षेत्रफल 4.850 हेक्टेयर यानी 48500 वर्ग मीटर भूमि को प्राइवेट व्यक्तियों ने अन्य किसी को विक्रय कर दिया है, और इस भूमि में से करोड़ों रुपए के हजारों पेड़ मौके से काटकर वन संपदा को हानि पहुंचाई गई है तथा भूमि में राष्ट्रीय मार्ग की तरफ मौके पर ग्रोवर फॉर्म नामक गेट लगाया दिया गया है |
शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार का कहना है कि राष्ट्रीय मार्ग पर स्थिति यह भूमि मार्केट मूल्य के हिसाब से कम से कम 40000 वर्ग मीटर के निर्धारित वैल्यू मानते हुए एक अरब 94 करोड़ की बनती है | उक्त भूमि विभागीय मिली भगत के चलते माफियाओं द्वारा कब्जा करके सरकार को अरबों रुपए की चपत लगाई जा रही है। अतः प्रतीत होता है कि आरक्षित वन भूमि के संबंध में इतना बड़ा घोटाला क्षेत्रीय लेखपाल रेंजर आदि के संज्ञान में बिना हुए संभव नहीं हो सकता। अतः आपसे अनुरोध है इस संबंध में उचित कार्रवाई कर सरकारी संपत्ति को खुर्द बुर्ज होने से बचाया जाए |
(Udaipur Kiran) / नरेन्द्र
