
भाेपाल, 21 मार्च (Udaipur Kiran) । मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण को लेकर सियासत गरमाई हुई है। मप्र हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को ओबीसी आरक्षण मामले में स्पष्ट तौर पर 13 फीसदी पद खाली रखने के निर्देश दिये हैं। कोर्ट ने कहा है कि सुप्रीम काेर्ट का फैसला आने तक सरकार बाकी 87 फीसदी पदों पर ही भर्ती हो। इस फैसले काे लेकर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार ने निशाना साधा है।
कमलनाथ ने शुक्रवार काे साेशल मीडिया एक्स पर पाेस्ट कर लिखा ओबीसी आरक्षण पर मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार का ओबीसी विरोधी चेहरा एक बार फिर सामने आया है। भाजपा के षड्यंत्र के कारण हाई कोर्ट को ओबीसी के लिए आरक्षित 27% पदों में से 13% पदों को होल्ड पर रखने का निर्णय करना पड़ा है। कमलनाथ ने आगे कहा ज़रा ग़ौर से देखिए कि किस तरह से भाजपा ने षडयंत्र रचकर हाईकोर्ट के सामने ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न कीं कि ओबीसी के 13% पद होल्ड कर दिए जाएं। 4 दिसंबर 2024 को हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से पूछा था कि 27% ओबीसी कोटे के साथ सभी पद क्यों नहीं भरे जा रहे? 27% ओबीसी आरक्षण का अपना क़ानून सरकार क्यों लागू नहीं कर रही है? यह वही क़ानून था जो 2019 में मेरी सरकार ने बनाया था।
कमलनाथ ने आगे कहा भाजपा सरकार ने हाई कोर्ट के इस फ़ैसले पर तुरंत अमल करने के बजाए बहुत सी याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट भेजने की चाल चली? इसी तरह 17 मार्च 2025 को हाईकोर्ट ने भाजपा सरकार से फिर पूछा कि वह ओबीसी के होल्ड पदों पर भर्ती क्यों नहीं कर रही है? लेकिन भाजपा सरकार ने होल्ड पदों पर भर्ती करने के बजाय स्वयं हाईकोर्ट को अपनी तरह तरफ़ से अंडरटेकिंग दी कि 13% पदों को होल्ड रखा जाए। सरकार के इस षड्यंत्र के बाद ही हाईकोर्ट ने ओबीसी के 13% पद होल्ड करने का निर्णय 20 मार्च 2025 को सुनाया। प्रदेश का ओबीसी वर्ग अब अच्छी तरह से समझ गया है कि कांग्रेस की सरकार ने 2019 में जो 27% आरक्षण दिया था, उसे ख़त्म करने के लिए भाजपा किसी भी हद तक गिर सकती है। अब समय आ गया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को उसका हक़ दिलाने के लिए क़ानूनी लड़ाई के साथ ही विधानसभा, संसद और सड़क हर जगह संघर्ष छेड़ना पड़ेगा।
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(Udaipur Kiran) / नेहा पांडे
