Haryana

कैथल: आशा वर्करों ने किया जिला सचिवालय में जोरदार प्रदर्शन

जिला सचिवालय में प्रदर्शन करते हुए आशा वर्कर
सीटीएम को ज्ञापन देते हुए आशा वर्कर।

कैथल, 24 मार्च (Udaipur Kiran) । जिले की आशा वर्करों ने लघुसचिवालय में जोरदार प्रदर्शन किया व नगराधीश कैथल के माध्यम से स्वास्थ्य मंत्री भारत सरकार के नाम ज्ञापन सौंपा। अपने ज्ञापन में आशा वर्करों ने मांग की कि नैशनल हैल्थ मिशन को स्थाई रूप से स्वास्थ्य कार्यक्रम बनाकर उन्हें पक्के कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। इस बारे भारतीय श्रम सम्मेलन ने भी सिफारिश की है। ज्ञापन में बारह मांगों का उल्लेख है। इससे पहले जिले की वर्कर सचिवालय परिसर पार्क में रीना खेड़ी की अध्यक्षता में इकट्ठा हुई।

मंच का संचालन करते हुए कविता राजौंद ने बताया कि उन पर आए दिन नए नए काम थौंपे जा रहे हैं, लेकिन सुविधाएं देने के नाम पर उनके साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है। केन्द्र सरकार ने 2018 के बाद उनके मानदेय व वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। सभी प्रकार के स्वास्थ्य संस्थानों में उनके लिए आशा विश्राम कक्ष भी नहीं है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ की बात की जा रही है , लेकिन उनके लिए छ: महीने का सवेतन अवकाश,साल में बीस आकस्मिक अवकाश व चिकित्सा अवकाश लागू नहीं है। डिजटलीकरण के लिए उन्हें अच्छी गुणवत्ता वाले टैबलेट, डेटा पैक, नेटवर्क तथा प्रशिक्षण उपलब्ध करवाया जाए , आनलाइन काम के लिए उन्हें इंसेंटिव दिए जाएं, आशा वर्करों को वरिष्ठता के आधार पर अन्य पदों पर पदोन्नति दी जाए , उनकी यह भी मांग है कि उन्हें फील्ड ड्यूटी के लिए स्कूटी दी जाए व यात्रा व्यय का भुगतान हो ,चार लेबर कोड रद्द करने की भी उन्होंने मांग की है जोकि उन्हें मिलें हुए अधिकार छीनते है।

ंगठन की वरिष्ठ नेत्रियों आशा मानस , सन्तोष सजूमा ,सुमन पांचाल व रामकली बालू ने बताया कि हरियाणा सरकार ने उनकी तिहत्तर दिनों की हड़ताल का वेतन आश्वासन देने के बावजूद अब तक नहीं दिया है। स्थानीय मांगों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अनेकों रजिस्टर मैनटेन करने के लिए बोला जाता है लेकिन रजिस्टर तक उपलब्ध नहीं करवाए जाते। अपनी जेब से फोटो स्टेट भी उन्हें करवानी पड़ती है। स्थानीय मांगों का भी एक ज्ञापन सीटीएम को दिया गया। जिस पर उन्होंने कारवाई का आश्वासन दिया है। सभा व प्रदर्शन को सीटू नेताओं नरेश रोहेड़ा व जयप्रकाश शास्त्री ने भी सम्बोधित किया व बताया कि हरियाणा में पिछले दस सालों से न्यूनतम वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।

(Udaipur Kiran) / मनोज वर्मा

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