Bihar

जीविका दीदियों ने पेश की अनोखी मिसाल, स्वरोजगार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

-बीते पांच वर्ष में जीविका दीदियों ने लगाए 3.39 करोड़ पौधे

पटना , 18 मार्च (Udaipur Kiran) ।

राज्य में जीविका दीदियां स्वरोजगार के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभा रही हैं। एक करोड़ से अधिक जीविका दीदियों ने बीते पांच साल में करीब 3.39 करोड़ पौधों को लगाकर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया है। उनके इस नेक प्रयास की वजह से राज्य में हरियाली बढ़ाने में बड़ी मदद मिली है।

राज्य के वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग एवं केंद्र के ग्रामीण विकास मंत्रालय की मनरेगा योजना के तहत 789 जीविका दीदियों ने पौधशालाएं (दीदी की नर्सरी) विकसित की हैं, जिसमें 403 नर्सरी मनरेगा के तहत और 310 नर्सरी वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की मदद से विकसित की गई है।

शिवहर जिले के पिपराही प्रखंड स्थित मीनापुर बलाहा गांव निवासी रुबी देवी ”दीदी की पौधशाला” से स्वरोजगार पाकर आत्मनिर्भर बनी हैं। रुबी देवी के पति के निधन के बाद परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा था। इस मुश्किल घड़ी में रुबी देवी जीविका से जुड़ीं, जिसके बाद वन और पर्यावरण मंत्रालय की योजना में शामिल होकर उन्होंने अपनी खुद की पौधशाला तैयार की, जिसमें उन्होंने 20 हजार से अधिक पौधे उगाए हैं। इससे उन्हें सालाना 1.5 से 2 लाख रुपये तक की आय होती है।

कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड की नीमा गांव निवासी रेविका टुडू ने भी कमाल किया है और बांस से बने शिल्प उत्पाद बेचकर आत्मनिर्भर बनी हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश की हैं। यहां मुसहर और संथाल समुदाय के लोग जो परंपरागत रूप से बांस के उत्पाद बनाते हैं, उन्हें जीविका के माध्यम से वेणु शिल्प उत्पादक समूह बनाकर स्वरोजगार से जोड़ा गया है।

रेविका टुडू का परिवार कभी शराब व्यवसाय से जुड़ा हुआ था, लेकिन अब उन्होंने अलग राह चुनी है और वेणु यानी बांस से बने शिल्प उत्पाद जैसे – कप, ट्रे, ग्लास और सुराही समेत कई चीजें बना रही हैं। इससे उन्हें महीने के 8 से 10 हजार रुपये की कमाई हो जाती है।

अररिया जिले में सदर प्रखंड की बेलवा की रहवासी इंदु देवी ‘दीदी की रसोई’ चलाकर स्वाबलंबी बनी हैं। पति के निधन के बाद उनके पूरे परिवार की माली हालत काफी ख़राब हो गयी थी। पूरी फैमिली बुरे दौर से गुजर रही थी। ऐसे वक्त में उन्हें जीविका का सहारा मिला। वे सदर अस्पताल अररिया में ‘दीदी की रसोई’ चलाती हैं, जिससे उन्होंने अब तक साढ़े पांच लाख रुपये का मुनाफा हुआ है।

दीप जीविका महिला संकुल राष्ट्रवादी संघ की अध्यक्ष इंदु देवी ने भी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जंग छेड़ रखी हैं। उन्होंने बाल विवाह, दहेज प्रथा और नशाखोरी के खिलाफ जागरुकता फैलाने में अहम भूमिका निभाई है। इसके साथ ही वे लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति भी जागरूक कर रही हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार का लगातार पर्यावरण संरक्षण पर फोकस रहा है, जिसकी वजह से बिहार के हरित आवरण में लगातार इजाफा हो रहा है। बिहार सरकार ने हरित आवरण को 17 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा है। लिहाजा बड़े पैमाने पर पौधों की उपलब्धता के लिए निजी पौधशालाओं का विस्तार सभी प्रखण्डों में किया जा रहा है। साथ ही किसानों और जीविका समूहों को इससे जोड़ा गया है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी हो सके।

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(Udaipur Kiran) / गोविंद चौधरी

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