
-कानून की पढ़ाई में भारतीय न्याय पद्धति को शामिल करना अनिवार्य : अशोक मेहता -महाकुम्भ 2025 की स्मारिका का हुआ विमोचन
प्रयागराज, 05 मार्च (Udaipur Kiran) । शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय संयोजक ए विनोद ने कहा कि भारत के संविधान में वर्णित इंडिया दैट इज भारत वाक्य के मूल में वास्तविक शब्द भारत है। तात्कालिक कारणों से उस वक्त अंग्रेजी में इंडिया शब्द का उपयोग किया गया। हालांकि लोग इसकी अलग-अलग तरीके से व्याख्या करते हैं। मगर भारत अपनी संस्कृति और परम्परा के कारण जाना जाता है।
ए विनोद बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास की महाकुम्भ 2025 पर स्मारिका के विमोचन अवसर पर प्रयागराज आए थे। अधिवक्ताओं को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि न्याय के क्षेत्र से जुड़े लोगों को भारतीयता को आगे लाने के अभियान का नेतृत्व करना चाहिए। भारतीय मूल्यों को पुनर्स्थापित करने और विधिक शिक्षा में बदलाव लाने में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
भारतीय भाषा अभियान के राष्ट्रीय संयोजक अपर महाधिवक्ता अशोक मेहता ने कहा कि विधिक शिक्षा में भारतीय न्याय मीमांसा जैसे विषयों को पढ़ाया जाना आवश्यक है। अभियान के प्रयासों के कारण दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने विधि पाठ्यक्रम में मीमांसा को शामिल किया है। पूरे देश में इस प्रकार का पाठ्यक्रम लागू करवाने का प्रयास किया जा रहा है।
अभियान के काशी प्रांत संयोजक अजय कुमार मिश्रा जय हिन्द ने बताया कि अभियान की ओर से न्यायालयों में हिन्दी और अन्य भारतीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ाने के लिए सघन प्रयास किए जा रहे हैं। इस दिशा में कुछ हद तक सफलता भी मिली है। विमोचन कार्यक्रम में कुलवीर सिंह, प्रदीप जैसवार, अमन सिंह बिसेन, अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी, अमित सिंह, धर्मेंद्र सिंह, पवन राव, अनूप मिश्रा, एस पी शुक्ला, सुरेंद्र नाथ मिश्र, सत्येंद्र कुमार त्रिपाठी सहित तमाम अधिवक्ता मौजूद थे।
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(Udaipur Kiran) / विद्याकांत मिश्र
