
जयपुर, 25 मार्च (Udaipur Kiran) । राजस्थान हाईकोर्ट ने कॉलेज व्याख्याता को करियर एडवांसमेंट स्कीम का लाभ देने के संबंध में अदालती आदेश की करीब तीन साल तक पालना नहीं करने के मामले में आईएएस भवानी सिंह देथा, तत्कालीन कॉलेज आयुक्त शुचि त्यागी और संयुक्त कॉलेज शिक्षा आरसी मीणा को 28 मार्च को तलब किया है। अदालत ने तीनों अधिकारियों को कहा है कि यदि उनकी ओर से व्यक्तिश पेश होकर अवहेलना के लिए खेद प्रकट कर भविष्य में अदालती आदेशों के प्रति आदर और शीघ्र पालना का आश्वासन दिया जाता है तो अदालत उनके प्रति उदारता बरत सकता है। जस्टिस उमाशंकर व्यास की एकलपीठ ने यह आदेश डॉ. डीसी डूडी की अवमानना याचिका पर दिए।
अदालत ने कहा कि मामले में कठोर रुख अपनाने पर आदेश की 18 घंटे में पालना हो गई, जबकि यह पालना तीनों अधिकारी बिना अदालती हस्तक्षेप भी कर सकते थे। लोक सेवक के रूप में वरिष्ठ अधिकारियों का दायित्व और अधिक बढ जाता है। अधिकारी अपने कर्तव्य के प्रति निष्क्रिय रहे और निरंतर अवमानना करते रहे तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बात है। इस मामले में अधिकारियों ने पालना कर अपना बचाव कर लिया है, लेकिन लंबे समय तक पालना नहीं करने को लेकर अदालत उन्हें दंडित कर सकती है। ऐसे में अदालत में पेश होकर बताए कि क्यों न उन्हें अर्थदंड से दंडित किया जाए।
याचिका में अधिवक्ता अजय चौधरी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत कॉलेज व्याख्याता पद पर कार्यरत था। करियर एडवांसमेंट स्कीम का लाभ देते समय उसकी ओर से पूर्व में दूसरे राज्य में दी गई सेवा अवधि को नहीं जोडा गया। इस पर हाईकोर्ट ने 5 मई, 2022 को याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया। वहीं सुप्रीम कोर्ट से भी सितंबर, 2023 में राज्य सरकार को राहत नहीं मिली। इसके बावजूद अदालती आदेश की पालना नहीं की गई। गत सुनवाई को अदालत की ओर से कठोर रुख अपनाने पर राज्य सरकार ने आदेश की पालना 18 घंटे में कर रिपोर्ट अदालत में पेश कर दी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में रिकॉर्ड पेश कर बताया कि भवानी सिंह देथा के खिलाफ 46 अवमानना याचिकाएं लंबित हैं।
—————
(Udaipur Kiran)
