Haryana

रेवाड़ी में कायम रहीं पांच साै साल पुरानी परंपरा,नहीं हुआ होलिका दहन

नारनौल, 14 मार्च (Udaipur Kiran) । रेवाड़ी के गांव टीकला में पिछले 500 साल से चली आ रही परंपरा इस साल भी कायम रही। गांव में इस बार भी होलिका दहन नहीं किया गया। इस गांव में पिछले 500 साल से होलिका दहन नहीं हो रहा।

टीकला पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि बिरेंद्र टोकस ने शुक्रवार को बताया कि लगभग 500 साल से गांव में बाबा भगवानदास का नियम चला आ रहा है। जिस कारण होलिका दहन नहीं होता। बाबा फिजूलखर्ची के सख्त खिलाफ थे, इसी वजह से यहां केवल धुलेंडी का त्योहार मनाया जाता है। गांव में बाबा भगवानदास ने तपस्या की थी और यहीं पर समाधि ली। यहां समाधि स्थल पर मंदिर बनाया गया है। बाबा ने तपस्या के समय ग्रामीणों को अनावश्यक खर्च से बचाने को नियम बनाया था कि वह केवल धुलेंडी का त्योहार ही मनाएंगें।

होलिका दहन नहीं होगा। इस दिन भी बाजार से मिठाई लाने की बजाए घर पर ही लोग खीर-हलवा और चूरमा बना सकते हैं। उसके बाद से लोग बाबा का नियम मानते हुए केवल धुलेंडी के दिन धूमधाम से फाग खेलते हैं। बाबा ने ग्रामीणों से हुक्का, बीड़ी और शराब से दूरी बनाने का आह्वान भी किया था। बाबा के आदेश को मानते हुए इतने साल बाद भी हुक्का-बीड़ी काे ग्रामीण हाथ नहीं लगा रहे। ग्रामीणों की बाबा के प्रति इतनी श्रद्धा है कि 500 वर्ष बीत जाने के बाद भी उनके द्वारा बनाए गए नियम को गांव में अभी भी लागू किया हुआ है।

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(Udaipur Kiran) / श्याम सुंदर शुक्ला

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