
कोटा, 31 मार्च (Udaipur Kiran) । कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कहा कि पर्ची का मुद्दा पुरानी बात हो गई, आई-गई बात को क्यों कुरेदते हो। सरकार से कोई नाराजगी नहीं थी और अब दिल्ली हाईकमान के निर्देश पर पिछले पांच-छह दिनों से सक्रिय हुआ हूं।
मीणा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में सीट हारने पर नैतिकता के नाते मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। इसलिए काम नहीं कर पाया। अब नेतृत्व से आदेश मिला है काम करो। जो नाै महीने में नुकसान हुआ है, उसकी जल्द से जल्द भरपाई करेंगे।
इससे पूर्व एक दिन पहले 30 मार्च को सवाई माधोपुर में किराेड़ीलाल मीणा ने कहा था कि ऐसी कोई ताकत नहीं बची थी, जिसने मुझको चुनाव हराने की कोशिश नहीं की। घर के भी, बाहर के भी… बाद में पर्ची में हो गया, तो हम भी क्या करते? उन्होंने यह भी कहा था कि जब-जब सवाई माधोपुर से जीते, तभी मंत्री बने।
सोमवार को वे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भतीजे की मौत पर संवेदना व्यक्त करने कोटा आए थे।
मीडिया ने जब मंत्री से फोन टैपिंग से जुड़ा सवाल पूछा तो उन्होंने इसका कोई जवाब नहीं दिया।
कृषि मंत्री ने कहा कि समरावता में पूरा न्याय मिल गया। मैंने खुद मौके पर जाकर 19 निर्दोष लोगों को छुड़वाया। 52 लोग जेल में थे, जिनसे मिलने गया था। सरकार में था, इसलिए आरोपितों से मिलना ठीक नहीं था, फिर भी मामला शांत हो इसलिए गया। अन्य लोग भी उनियारा में मिलना चाहते हैं तो सरकार तैयार है। अब इसमें राजनीति हो रही है। जगह-जगह बोर्ड लगाना राजनीति है। नरेश मीणा के पिताजी सीएम से मिल चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कोई भरोसा दिया होगा, लेकिन कानून की जकड़ में आए को अदालत ही छोड़ेगी।
कृषि मंत्री ने कहा कि बूंदी और कोटा के किसानों ने फसल खराबा मुआवजे की शिकायत की है। कंपनी की गड़बड़ी की जांच के लिए कमेटी बना दी है। 109 करोड़ के बीमा में से मात्र नाै करोड़ दिया गया, 100 करोड़ को दाएं-बाएं कर दिया। सख्त कार्रवाई करेंगे। किसी को किसानों का हक नहीं खाने देंगे।
मीणा ने कहा कि कांग्रेस राज में बेरोजगार और भाजपा सड़कों पर थी। हमने आंदोलन किया, जेल गए, लाठियां खाईं, लेकिन वे कुंडली मारकर बैठे रहे। हमारी सरकार ने 50 थानेदारों को जेल भेजा। भ्रष्टाचार, किसान और बेरोजगारों के मुद्दों पर कार्रवाई कर रहे हैं। रोजगार मेले लगा रहे हैं, वैकेंसियां निकाली हैं।
मीणा ने कहा कि निगमों को बांटने से करने से परेशानी हुई। एक मेयर से काम चल सकता था, दो बनाना राजनीतिक लाभ के अलावा कुछ नहीं। व्यवस्थाएं बिगड़ी हैं। एक जगह रहने पर व्यवस्थाएं सुधरती हैं, समस्याओं का समाधान समय पर होता है और विकास भी बेहतर होता है।
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(Udaipur Kiran) / रोहित
