
नैनीताल, 27 मार्च (Udaipur Kiran) । हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत पर नोटबंदी के दौरान झारखंड में एक व्यक्ति को गौ सेवा आयोग का अध्यक्ष बनवाने के लिए उत्तराखंड के विभिन बैंक खातों में लिए गए घूस के पैसों के आरोपों, सूर्यधार लेक, भाई-भतीजों और नजदीकियों के भ्रष्टाचार में लिप्त होने के स्टिंग्स के मामले दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई के बाद एक मई की तिथि नियत की है।
मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार 2018 में उमेश कुमार शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। इस प्रकरण में याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और उनके सहयोगी की ओर से दाखिल अमेंडमेंट एप्लीकेशन पर सरकारी वकील ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा। वर्ष 2018 में विधायक खानपुर उमेश कुमार के अधिवक्ता ने तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत उनके भाई, भतीजे और सहयोग संजय गुप्ता को प्रतिवादी बनाकर याचिका दाखिल की गई थी जिस पर कोर्ट त्रिवेन्द्र रावत के भाई, भतीजे और सहयोगी संजय गुप्ता को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। याचिका में त्रिवेंद्र सिंह रावत, ओम प्रकाश, पंडित आयुष गौड़, अरविंद कुमार, संजय गुप्ता सहित अन्य को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट ने इस प्रकरण पर सुनवाई के लिए एक मई की तिथि नियत की है।
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(Udaipur Kiran) / लता
