Haryana

गुरुग्राम के अध्यापक  ने एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीते तीन स्वर्ण पदक 

फोटो नंबर-02: जीते गए गोल्ड मेडल व सर्टिफिकेट के साथ अध्यापक सतीश यादव।

-50 प्लस आयु वर्ग में ट्रिपल जंप, लम्बी कूद व ऊंची कूद में जीते मेडल

-गुरुग्राम में रहने वाले सतीश यादव दिल्ली के स्कूल में हैं हिंदी अध्यापक

-अध्यापक सतीश यादव पहले भी राष्ट्रीय स्तर पर जीत चुके हैं कई मेडल

गुरुग्राम, 22 दिसंबर (Udaipur Kiran) । आम तौर पर एक शिक्षक सिर्फ बच्चों को पढ़ाने तक ही सीमित रहता है, लेकिन अध्यापक सतीश यादव इससे दो कदम आगे हैं। वे पढ़ाई कराने के साथ-साथ मजबूती से खेल के मैदान पर भी उतरते हैं। हाल ही में हुई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल जीतकर नाम रोशन किया है। अध्यापक सतीश यादव की पत्नी रेनू यादव भी नेशनल मेडलिस्ट हैं।

गुरुग्राम के सेक्टर-56 के रहने वाले सतीश यादव दिल्ली सरकार में जौनापुर स्थित सर्वोदय बाल विद्यालय में हिंदी के अध्यापक हैं। हर साल की तरह इस साल भी उन्होंने 33वीं हरियाणा मास्टर्स एथलेटिक्स चैंपियनशिप में गुरुग्राम का प्रतिनिधित्व करते हुए अपना बेहतरीन प्रदर्शन किया। चंडीगढ़ में 14-15 दिसंबर को हुई इस चैंपियनशिप में उन्होंने 50 प्लस आयु वर्ग में ट्रिपल जंप, लम्बी कूद व ऊंची कूद में राज्य स्तर पर स्वर्ण पदक हासिल कर शहर, परिवार और स्कूल का नाम रोशन किया है। इसी साल दिल्ली योगा एसोसिएशन की ओर से इन्होंने योगा में 50 प्लस आयु वर्ग में दिल्ली स्टेट में गोल्ड मेडल जीता था। पलवल ऑल इंडिया योगा प्रतियोगिता में भी वे पहले स्थान पर रहे। वे अपने विद्याथियों को भी योगा सिखाते हैं और योगा प्रतियोगिताओं की तैयारी कराते हैं। उनसे प्रशिक्षित विद्यार्थी दिल्ली स्टेट योगा प्रतियोगिता में मेडल हासिल कर चुके हैं।

सतीश यादव ने इसी साल तीन मेडल 400 मीटर में गोल्ड, 200 मीटर में सिल्वर व खो-खो में ब्रॉन्ज मेडल हासिल किए हैं।

अब वे ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज के नेशनल कैंप में एथलेटिक्स की तैयारी कर रहे हैं। मास्टर्स कैटेगरी में केरल के त्रिवेंद्रम में चैंपियनशिप की भी तैयारी में जुटे हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में परिवार, समाज और युवाओं के लिए वे स्वस्थ रहने के बड़े रोल मॉडल हैं। खेलों के माध्यम से वे खुद फिट हैं और बच्चों को भी फिट रखने के लिए उन्हें नियमित खेल में लगाते हैं। अध्यापक सतीश यादव अपनी इन सफलताओं का सारा श्रेय परिवार, भाई-बहनों और साथी अध्यापकों को देते हैं। किसी न किसी रूप में वे इन सभी से पे्ररणा लेते हैं। उनका कहना है कि हमारे बच्चे, युवा स्वस्थ और फिट रहें, इसके लिए उन्हें किसी न किसी खेल में जरूर डालें। अच्छा खेलेेंगे तो खेलों में भविष्य बनेगा। सामान्य खेलकर वे खुद को फिट रख सकते हैं।

(Udaipur Kiran) हरियाणा

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