

गुवाहाटी, 21 मार्च (Udaipur Kiran) । पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (पूसीरे-निर्माण) के महाप्रबंधक अरुण कुमार चौधरी ने पिछले दिनों साईरंग यार्ड और साईरंग के पास पुल संख्या 196 का निरीक्षण किया। पुल संख्या 196 एक महत्वपूर्ण पुल है। यह सबसे जटिल पुल था और कुल 144 पुलों में से एकमात्र पुल था, जिसे पूरा किया जाना बाकी था। इसका निर्माण भैरबी-साईरंग नई रेलवे लाइन परियोजना के एक हिस्से के रूप में किया गया। यह भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेलवे कनेक्टिविटी बढ़ावा प्रदान करने में एक उल्लेखनीय माइलस्टोन है।
पूसीरे के सीपीआरओ कपिंजल किशोर शर्मा ने आज बताया है कि पुल संख्या 196 का निर्माण तलौंग नदी पर मुआलखांग-साईरंग ब्लॉक सेक्शन में चेनेज 48856.64 पर किया जा रहा है, जो साईरंग यार्ड की ओर है। पुल में कुल पांच खंभे हैं, जिनमें सबसे लंबे खंभे (पी/4) की ऊंचाई 103.40 मीटर है। इस पुल की कुल लंबाई 377.98 मीटर है। क्षेत्र की चुनौतीपूर्ण स्थलाकृति के कारण, पुल में स्पैन की एक अद्वितीय व्यवस्था है, जिसमें विशेष रूप से साईरंग छोर की ओर ढ़लान वाली घाटी है।
निरीक्षण के दौरान, अरुण कुमार चौधरी के साथ परियोजना से जुड़े वरिष्ठ रेल अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने चल रही निर्माण गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा की और तकनीकी कर्मियों के साथ बातचीत की तथा इस जटिल बुनियादी संरचना के कार्य के प्रति उनके समर्पण और योगदान की सराहना की। दौरे के दौरान, महाप्रबंधक ने पुल के तकनीकी कर्मचारियों के साथ भोजन किया और इस परियोजना को पूरा करने के लिए इंजीनयरिंग चुनौतियों पर काबू पाने में उनके अथक प्रयासों की सराहना की। पुल संख्या 196 का निर्माण होना भौगोलिक बाधाओं को दूर करने और क्षेत्र में आर्थिक एवं सामाजिक विकास को बढ़ावा देने के प्रति भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।
मिजोरम में आइजोल को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली 51.38 किलोमीटर लंबी भैरबी-साईरंग नई रेलवे लाइन परियोजना मिजोरम की कनेक्टिविटी में बदलाव लाने को तैयार है, जिसका 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। यह नई लाइन परियोजना चार सेक्शनों में विभाजित है, यानी भैरबी-हरतकी, हरतकी-कौनपुई, कौनपुई-मुआलखांग और मुआलखांग-साईरंग। यह परियोजना पूर्वोत्तर राज्यों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने, परिवहन दक्षता में सुधार करने और क्षेत्रीय व्यापार एवं पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण पहल है।
पूसीरे इस ऐतिहासिक परियोजना को शीघ्र पूरा करने तथा मिजोरम और अन्य क्षेत्र के लोगों के लिए निर्बाध रेल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने को प्रतिबद्ध है।
(Udaipur Kiran) / श्रीप्रकाश
