Madhya Pradesh

धार जिले में बनेगा डायनोसोर नेशनल पार्क एवं सरदारपुर वन्यजीव अभ्यारण्य

संभागायुक्त दीपक सिंह की अध्यक्षता में बैठक

– पर्यटकों को आकर्षित करने के लिये विशेष प्रयास किये जाएंगे : संभागायुक्त

इंदौर, 17 मार्च (Udaipur Kiran) । मध्य प्रदेश में वन्य जीव संरक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से भी संरक्षित क्षेत्र धार जिले के बाग तहसील में डायनोसोर नेशनल पार्क बनेगा। इसके साथ ही धार जिले के सरदार पुर में वन्यजीव अभ्यारण्य का निर्माण किया जाएगा। यह जानकारी सोमवार शाम को इंदौर संभागायुक्त दीपक सिंह की अध्यक्षता में डायनोसोर नेशनल पार्क एवं सरदारपुर वन्यजीव अभ्यारण्य के संबंध में हुई बैठक में दी गई। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में धार कलेक्टर प्रियंक मिश्र, उपायुक्त सपना लोवंशी, जिला वन मंडलाधिकारी सहित पंचायत एवं वन विभाग के अधिकारी शामिल हुए।

बैठक में संभागायुक्त दीपक सिंह ने बताया कि धार जिले के बाग तहसील में बनने वाले डायनोसोर नेशनल पार्क पार्क के चारों और बोरकुरी, रिसावाला, बयादीपुरा (पाडलिया) और गंगकुई (जामनियापुरा) ग्राम हैं। यह नेशनल पार्क भी अन्य नेशनल पार्कों की तरह इको सेंसेटिव झोन के अंतर्गत है। यह क्षेत्र वन्य जीव संरक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से भी संरक्षित क्षेत्र है। यह नेशनल पार्क भोपाल और मेघनगर रोड़ के बीच में होगा। मेघनगर रेलवे स्टेशन से इसकी दूरी 95 किलो मीटर होगी, जबकि इंदौर रेल्वे स्टेशन से 152 किलो मीटर और भोपाल रेल्वे स्टेशन से दूरी 350 किलो मीटर होगी। इस नेशनल पार्क के आसपास बड़केश्वर महादेव मंदिर, हनुमान मंदिर, ऐतिहासिक बाग गुफाएं और किले हैं, जो पर्यटकों को यहां आने के लिये आकर्षित करेंगे। इस नेशनल पार्क में शीशम, नीम, आंवला सहित हजारों प्रजातियों के आयुर्वेदिक एवं औषधीय पेड़ होंगे, वहीं सियार, लोमड़ी जैसे वन्य जीव भी होंगे।

उन्होंने बताया कि पर्यटकों की दृष्टि से भी यह पार्क सबको लुभाएगा। वर्तमान में यहां सालाना 15 हजार से अधिक पर्यटक आतें है। पार्क बन जाने के बाद पर्यटकों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। इस क्षेत्र में घूमने का सबसे श्रेष्ठ समय अक्टूबर से लेकर दिसम्बर तक का होता है। उस समय तीन-चार गुना अधिक पर्यटक आतें हैं। वीकेंड पर भी संख्या बढ़ जाती है।

संभागायुक्त दीपक सिंह ने बताया कि डायनोसोर नेशनल पार्क को बनाते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा जाएगा कि आदिवासी समाज के अधिकारों का हनन नहीं हो, क्योंकि इस क्षेत्र में आदिवासी समाज बहुसंख्यक में है। इसलिये उनकी परम्परा, त्यौहार, उत्सव आदि का विशेष ध्यान रखा जायेगा। पार्क के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का विशेष ध्यान रखा जाएगा। पार्क के समीप ऐसी गतिविधियां चलाई जाएंगी, जिससे प्रकृति को भी नुकसान नहीं पहुंचे और आदिवासी समाज को भी रोजगार मिल सके। क्षेत्र में बाग प्रिंट को बढ़ावा दिया जाएगा और युवाओं का स्कील डेवलपमेंट किया जाएगा।

बैठक में सरदारपुर वन्यजीव अभ्यारण्य पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बताया गया कि यह वन्यजीव अभ्यारण्य भी इको सेंसेटिव झोन के अंतर्गत होगा। इस वन्य जीव अभयारण्य में विभिन्न प्रकार के वन्यजीव जैसे लोमड़ी, बंदर, लंगूर, सियार सहित विभिन्न प्रकार के पक्षी भी होंगे। विशेषकर खरमोर पक्षी का संरक्षण किया जायेगा। इस क्षेत्र में खरमोर पक्षी विशेष रूप से पाये जाते हैं। यहां टीक, बबूल, पलाश, अंजन जैसे कई पेड़ पौधों की विशाल श्रृंखला होगी। अभ्यारण्य में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा जायेगा। पर्यटकों को आकर्षित करने के विशेष प्रयास किये जायेंगे। मालवा और निमाड़ की दृष्टि से सरदारपुर वन्यजीव अभ्यारण्य महत्वपूर्ण केन्द्र साबित होगा। यह जूलॉजी के विद्यार्थियों के सीखने के लिये महत्वपूर्ण केन्द्र बन सकता है। बैठक में संबंधित अधिकारियों ने भी अपने सुझाव रखे।

(Udaipur Kiran) तोमर

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