हाई कोर्ट पहुंची महाराष्ट्र सरकार
मुंबई, 10 मार्च (Udaipur Kiran) । छत्रपति शिवाजी महाराज और छत्रपति संभाजी महाराज के बारे में आपत्तिजनक बयान देने के मामले में महाराष्ट्र सरकार ने प्रशांत कोरटकर के खिलाफ बांबे हाई कोर्ट की ओर रुख किया है। कोरटकर को कोल्हापुर की निचली अदालत द्वारा दी गई अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है। राज्य सरकार ने उनकी जमानत रद्द करने की मांग करते हुए दावा किया है कि कोरटकर जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
राज्य सरकार और पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। दूसरी ओर कोरटकर पुलिस के साथ जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और जांच अधिकारियों के कार्यालय में जाने से बच रहे हैं। सरकारी वकील हितेन वेनेगांवकर ने सोमवार को दावा किया कि इससे जांच में बाधा आ रही है। उन्होंने न्यायमूर्ति राजेश पाटिल की एकल पीठ के समक्ष आवेदन दिया। इसे संज्ञान लेते हुए अदालत ने आवेदन पर सुनवाई मंगलवार के लिए निर्धारित की है।
कोल्हापुर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डी.वी. कश्यप ने कोरटकर को अस्थायी राहत देते समय कुछ शर्तों का पालन करने का आदेश दिया था। उन्हें बुलाने पर कोल्हापुर के जूना राजवाड़ा पुलिस स्टेशन में उपस्थित होने और गिरफ्तारी पूर्व राहत प्राप्त करने के 48 घंटे के भीतर अपना मोबाइल फोन साइबर सेल, नागपुर पुलिस को सौंपने का आदेश दिया गया था। राज्य सरकार ने जमानत रद्द करने की मांग करते हुए अपने आवेदन में दावा किया है कि कोरटकर ने अपनी पत्नी के माध्यम से नागपुर साइबर सेल को मोबाइल फोन भेजकर अदालत द्वारा लगाई गई दोनों शर्तों का उल्लंघन किया है।
कोरटकर का अपराध गंभीर प्रकृति का है और समाज के विरुद्ध है। आरोपी ने छत्रपति संभाजी महाराज और छत्रपति शिवाजी महाराज के खिलाफ विवादास्पद और आपत्तिजनक बयान दिया है। उन्होंने जातियों के बीच दरार पैदा करने की कोशिश की है। यदि निचली अदालत आदेश को रद्द नहीं करती है तो इसका मामले पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। आरोपी मामले के गवाहों पर दबाव डाल सकता है। सरकार ने अपने आवेदन में अंतरिम आदेश को रद्द करने का भी अनुरोध किया है।
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(Udaipur Kiran) / वी कुमार
