Madhya Pradesh

मप्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक ने किया शीर्षासन, बोले – मुझे राजनीति नहीं आती, मैं संत बन जाऊंगा

मप्र विधानसभा (फाइल फोटो)

भोपाल, 20 मार्च (Udaipur Kiran) । मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के सातवें दिन गुरुवार को सदन में बजट अनुदान मांगों पर चर्चा हुई। इस दौरान पीएचई विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने कहा कि मेरे क्षेत्र में विकास के लिए सरकार ने बजट में कोई प्रावधान नहीं किया है। इसे लेकर उन्होंने शीर्षासन किया। उन्होंने कहा कि मुझे राजनीति नहीं आती। मैं संत बन जाऊंगा।

सदन में पीएचई विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक बाबू जंडेल ने अपने वक्तव्य के दौरान कहा कि मेरे विधानसभा क्षेत्र के विकास को लेकर सरकार ने कोई बजट नहीं दिया है। इससे मुझे बड़ा असंतोष है। मैं पहले संत था। मुझे राजनीति नहीं आती, इसलिए मैं फिर संत बन जाऊंगा। उन्होंने जल जीवन मिशन में गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसके बाद अपना वक्तव्य बंद कर नाराज बाबू जंडेल ने सदन में शीर्षासन किया। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर के कहने पर कांग्रेस विधायक दिनेश गुर्जर ने जंडेल को शीर्षासन से उठाकर सीट पर बैठाया। विधानसभा अध्यक्ष ने जंडेल के वक्तव्य की तारीफ की।

इससे पहले लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा शुरू हुई तो कांग्रेस विधायक अनुभा बंजारे ने बालाघाट में मेडिकल कॉलेज की मांग की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को 200 किलोमीटर दूर नागपुर जाना पड़ता है। लोगों की जान भी जाती है। भाजपा विधायक शैलेंद्र जैन ने भी सागर जिले में मेडिकल कॉलेज में ट्रॉमा सेंटर की मांग की और कहा कि स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग के बजट में किसी तरह की कटौती नहीं होनी चाहिए। जितनी अधिक सुविधा हो वह सरकार को करना चाहिए। मेडिकल कॉलेज में न्यूरोलॉजी विभाग नहीं है। इस वजह से भी न्यूरो से संबंधित मरीजों को दिक्कत होती है। जैन ने ब्लड बैंक की सुविधा शुरू नहीं होने की भी बात कही। उन्होंने एसएनसीयू और पीआईसीयू की सीट बढ़ाने की भी मांग की।

लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों पर उप मुख्यमंत्री और विभाग के मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के बजट में नौ फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। हमारा बजट जरूरतों की पूर्ति के हिसाब से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सतना मेडिकल कॉलेज में कैंसर यूनिट की व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार बनने के बाद से 4300 पैरामेडिकल में 16000 आउटसोर्स कर्मचारियों के पद भरे जा रहे हैं। राइट-टू-हेल्थ, राइट-टू-एजुकेशन के साथ राइट-टू-स्क्रीनिंग अभियान चलाया जा रहा है। इसमें सभी विधायकों से सक्रिय भागीदारी निभाने का अनुरोध है। प्रदेश में यह अभियान 20 फरवरी से शुरू हुआ है जो 31 मार्च तक चलेगा। इसमें 48 लाख लोगों के हाई ब्लड प्रेशर की जांच 10 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।

शुक्ला ने कहा कि मध्य प्रदेश की पहल पर केंद्र सरकार ने डे केयर सेंटर खोलने का काम देशभर में शुरू किया है। 2003 में 497 महिलाओं की प्रसव के दौरान मौत हो जाती थी जो अब घटकर 173 रह गई है। ऑर्गन डोनेशन का जिक्र करते हुए शुक्ला ने कहा कि हवाई सेवा के जरिए ऑर्गन एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने और ट्रांसप्लांट करने के काम में तेजी आई है। आगामी 15 अप्रैल से सभी जिला अस्पतालों में शव वाहन की सुविधा मिलने लगेगी। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो गई है। मृत्यु होने की दशा में गरीबों के परिजन को सम्मान के साथ उनके गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था इन वाहनों से की जाएगी।

शुक्ला के संबोधन के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि आदिवासी इलाकों में आज भी स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था झोलाछाप डॉक्टरों के हवाले हैं। अस्पताल भवन बने हैं, लेकिन डॉक्टर की पोस्टिंग नहीं हो पा रही है। उपकरण हैं, लेकिन इलाज के लिए डॉक्टर नहीं हैं। सिंघार की ओर से आउटसोर्स के हवाले कर्मचारी व्यवस्था करने का विरोध भी किया गया। इस दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन नहीं दिए जाने का मामला भी सदन में उठा। इसके जवाब में मंत्री शुक्ला ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों के वेतन की चिंता न करें, उसे सुधारा जाएगा।

उप मुख्यमंत्री शुक्ला ने कहा कि बी और सी कैटेगरी के शहरों में सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल खोलने की तैयारी सरकार कर रही है। इस दौरान शुक्ला ने इंदौर, सतना और रीवा मेडिकल कॉलेज का उन्नयन करने के लिए राशि बढ़ाने का ऐलान भी किया। डिप्टी सीएम के प्रस्ताव के बाद लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की अनुदान मांगों को पारित घोषित किया गया।

इसके बाद ऊर्जा विभाग की मांगों पर चर्चा के दौरान भांडेर विधायक फूल सिंह बरैया ने कहा कि प्रदेश में आबादी के हिसाब से सब स्टेशनों की संख्या घट रही है। भांडेर में 50 बिस्तर का अस्पताल है, लेकिन यहां बिजली नहीं है। पिछले दिन एक महिला की टॉर्च की रोशनी में डिलीवरी करनी पड़ी थी। जब मैंने मौके पर जाकर देखा तो बिजली सप्लाई केंद्र बनाया गया था, वहां कुत्ते सो रहे थे। सरकार को चाहिए अस्पतालों में बिजली सप्लाई लगातार बने रहे, ताकि किसी की जान न जाए।

तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने बिजली बिल जमा नहीं होने पर की जाने वाली कुर्की की र्कारवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि लोगों के घरों से बाइक, साइकिल और अन्य सामान उठा लिए जाते हैं। इसके बाद भारी-भरकम बिल दिया जाता है। इसे लेकर सदन में सत्ता पक्ष के कुछ सदस्यों ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि 2003 में और बुरी स्थिति थी।

जावद विधायक ओमप्रकाश सखलेचा ने एक पंचायत को एनर्जी के मामले में आत्मनिर्भर बनने में आड़े आ रहे राजस्व विभाग का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि पंचायत ने अब तक 20 लाख रुपए खर्च कर दिए हैं। दस लाख की एफडी दी है। लेकिन इसके लिए जमीन आवंटन में राजस्व विभाग के अधिकारियों की मनमानी बाधक बन रही है। बाला बच्चन ने बड़वानी जिले में अपनी विधानसभा में फीडर सेपरेशन का मामला उठाया।

अमरपाटन से कांग्रेस विधायक राजेंद्र कुमार सिंह ने बिजली के झूलते तारों का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि गांवों में बिजली के तार हाथ से पकड़ लेने की स्थिति में रहते हैं। इस कारण दुर्घटनाएं होती हैं। बिजली कंपनी के अधिकारी एक आदमी का बिल जमा नहीं करने पर पूरे ट्रांसफॉर्मर की बिजली काट देते हैं। यह व्यवस्था गलत है, ऐसा नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी के अधिकारी 100 रुपए में 100 यूनिट बिजली बिल वाले उपभोक्ताओं को कम करने के लिए रोज नए पैंतरे लगाते हैं। इसे भी रोका जाना चाहिए ताकि गरीबों के साथ अन्याय न हो।

ऊर्जा विभाग की अनुदान मांगों पर ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने विस्तार से जानकारी दी। ऊर्जा मंत्री तोमर के जवाब के दौरान नोकझोंक का दौर चला। बिजली बिल और बिजली सप्लाई को लेकर विपक्षी सदस्यों ने टोका-टाकी की। इस दौरान मंत्री तोमर ने कहा कि हमारे पास 24 हजार मेगावाट से अधिक बिजली उपलब्ध है। पिछले महीने 18,913 मेगावाट की सर्वाधिक डिमांड को पूरा किया गया। इस बार ऊर्जा विभाग के लिए पिछले साल के मुकाबले 47 फीसदी से अधिक का बजट दिया गया है। इसके बाद ऊर्जा विभाग की अनुदान मांगों को पारित घोषित कर दिया गया।

(Udaipur Kiran) तोमर

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