
बिलासपुर, 24 मार्च (Udaipur Kiran) । अरपा नदी के संरक्षण और संवर्धन की मांग को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई हुई है। चीफ जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस रविन्द्र कुमार अग्रवाल की बैंच ने नदी के सूखने पर चिंता जताई है। वहीं कोर्ट अवैध उत्खनन सहित परिवहन को रोकने को लेकर भी उठाए जा रहे कदम पर असंतुष्ट नजर आया।हाइकोर्ट ने नदी के पुनर्जीवन को लेकर चल रही जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए नदी के सूखने पर चिंता जताई और बिलासपुर कलेक्टर के प्रयास पर भी नाराजगी जाहिर की है।हाई कोर्ट ने नगर निगम आयुक्त से इस मसले में अगली सुनवाई में शपथ पत्र में जवाब मांगा है।
अगली सुनवाई 22 अप्रैल को तय की गई है।
चीफ जस्टिस ने कहा डी एम नदी की सफाई कर रहे हैं, फोटो खिंचाने के लिए सफाई कर रहे हैं..! कलेक्टोरेट मेंडी एम का काम छोड़ दें, वहीं सफाई करें..! क्या है ये, क्या दिखाना चाहते हैं..? यह काम है डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का..? इस टिप्पणी से कोर्ट रूम में सब स्तब्ध रह गए ।उन्होंने ये भी कहा कि वे जिले के जिम्मेदार अधिकारी हैं, उन्हें सकारात्मक कदम उठाने चाहिए। अरपा नदी इनके दो फावड़ा चलाकर साफ हो जाएगी…? उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा वे पब्लिक सर्वेंट है, अपनी ड्यूटी ऑफिस में बैठकर करें..! वे कहीं जा रहे हैं, कोई बात नहीं, लेकिन ये क्या कर रहे हैं..? कोर्ट ने पूरे राज्य में ऐसी चीजों और संस्कृति को लेकर नाराजगी जताई है..!
हाइकोर्ट में सोमवार को सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने इस पूरे मामले में सचिव के शपथ पत्र पेश किए जाने की जानकारी दी। वहीं राज्य शासन के अवैध उत्खनन परिवहन और भंडारण के बढ़ते मामले पर रोक लगाने के कोर्ट के निर्देश पर अन्य राज्यों के नियमों को परीक्षण करने एक 6 सदस्यीय समिति के गठित किए जाने की जानकारी दी। जिसमें खनिज विभाग के उपसंचालक और खनिज अधिकारी शामिल हैं। जिन्हें 30 दिन में रिपोर्ट पेश करने कहा गया है। इस समिति की रिपोर्ट में दिए परामर्श के बाद खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के प्रावधान के नियमों में बदलाव से जुड़ी प्रक्रिया को विधि विभाग में पेश किए जाने की जानकारी दी।
वहीं इस मामले में सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता प्रफुल्ल एन भारत ने 12 फरवरी 2025 को कोर्ट के दिए आदेश के परिपालन में सचिव, खान एवं खनिज विभाग के शपथपत्र पेश किए जाने की जानकारी दी। नगर निगम बिलासपुर आयुक्त के शपथ पत्र को पेश किए जाने की जानकारी अधिवक्ता आर एस मरहास ने दी। जिसमें बताया गया कि स्ट्रीम इंफ्रा डेवलपमेंट कंसल्टेंट प्राइवेट लिमिटेड पुणे से परियोजना रिपोर्ट प्राप्त कर ली गई है। डीपीआर के सत्यापन के लिए मुख्य अभियंता पीएचई विभाग से तकनीकी रिपोर्ट मांगी गई थी। जो अप्रूव्ड होने के बाद कंपनी से रिवाइज प्लान 10 फरवरी 2025 को मिल गया है। जिसमें प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद टेंडर भी किया गया है।
दरअसल खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 तहत आपराधिक मुकदमा चलाने का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट ने 12 फरवरी 2025 के अपने आदेश में खनिजों के अवैध उत्खनन और अवैध परिवहन में वृद्धि होने और अवैध उत्खनन में लिप्त व्यक्तियों पर जुर्माना राशि के कम होने की बात कही थी। इसके अलावा कि राज्य पर ऐसे व्यक्तियों के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए सख्त कानून लाने निर्देश दिया था। साथ ही टिप्पणी की थी कि जुर्माना और कम्पाउंडिंग उद्देश्य की पूर्ति नहीं कर रहे हैं। इससे राज्य के संपूर्ण प्राकृतिक संसाधन नष्ट हो रहे हैं। भरोसा जताया था कि राज्य सरकार इस मामले को गंभीरता से लेगी और जल्द से जल्द कानून बनाएगी। साथ ही यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि राज्य के प्राकृतिक संसाधनों के संबंध में पूरे राज्य में कोई अवैध उत्खनन नहीं किया जाए। इस मामले में सचिव से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने और ऐसी कोई घटना सामने आती है तो न्यायालय ने दोषी अधिकारियों के साथ-साथ संबंधित व्यक्ति के विरुद्ध भी सख्त कार्रवाई करने के लिए बाध्य होने के निर्देश दिए थे। वहीं अरपा नदी की सफाई और ट्रीटमेंट प्लांट के संबंध में आगे की प्रगति की भी जानकारी मांगी थी। जिसपर राज्य शासन के अधिवक्ता और नगर निगम के अधिवक्ता के माध्यम से शपथ पत्र में जवाब पेश किया गया है। वही हाई कोर्ट ने इस पूरे मामले को लेकर खनिज विभाग के सचिव और नगर निगम आयुक्त बिलासपुर से शपथ पत्र में जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है।
(Udaipur Kiran) / Upendra Tripathi
