
-तापी में पारंपरिक आदिवासी भोजन परोसने वाले रेस्टोरेंट का सालाना टर्नओवर 41 लाख रुपये
अहमदाबाद, 07 मार्च (Udaipur Kiran) । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुसार देश की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2023 में ‘लखपति दीदी’ योजना शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य 2027 तक देश की तीन करोड़ महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है जबकि वर्ष 2025 तक गुजरात की 10 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य गुजरात सरकार ने निर्धारित किया है।
इसी योजना के तहत राज्य की अनेक महिलाएं स्वरोजगार और स्वयंसहायता समूहों से जुड़कर अपनी आजीविका कमाकर न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं बल्कि लाखों रुपये की आमदनी कर रही हैं। इसी का परिणाम है ‘सखी मंडल‘ जिसके कारण अलवाडा गांव निवासी रमीलाबेन मुकेशभाई जोशी का जीवन बदल गया है। उन्होंने कहा कि ‘सखी मंडल‘ से हमें जीने के लिए ऑक्सीजन मिली है। रमीलाबेन ने 2024 में दीपक की बाती बनाने का काम शुरू कर केवल एक वर्ष में 1 लाख रुपये से अधिक की आय अर्जित की है।
गुजरात सरकार के सूचना विभाग की विज्ञप्ति के अनुसार राज्य की महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ योजना का अधिक से अधिक लाभ मिले, इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में व्यापक प्रयास किए गए हैं। नतीजतन, आज राज्य में लगभग 1 लाख 50 हजार महिलाओं की आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है और वे गर्व के साथ गुजरात की ‘लखपति दीदी’ बन गई हैं। वहीं सरकार ने वर्ष 2025 तक गुजरात की 10 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य गुजरात
सरकार ने निर्धारित किया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2024 में कहा था, “लखपति दीदी योजना देश भर में महिलाओं को सशक्त बनाने का एक प्रमुख माध्यम बन रही है। स्वयं सहायता समूहों के साथ जुड़ीं हमारी माताएं, बहनें और बेटियां विकसित भारत के निर्माण की एक मजबूत कड़ी हैं।” पूरे देश में 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य के मुकाबले गुजरात 10 लाख ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कैसे काम करती है लखपति दीदी योजना-
यह योजना स्वयं सहायता समूहों से जुड़ीं ग्रामीण महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए सहायता प्रदान करती है ताकि उनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो सके। योजना के तहत महिलाएं कृषि, पशुपालन, हस्तकला और अन्य स्थानीय क्षेत्रों में अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। सरकार इसके लिए प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बाजार के साथ जुड़ने की सुविधा प्रदान करती है, जिससे उनकी आय में इजाफा हो सके।
केंद्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार लखपति दीदी के लिए आय की गणना में कृषि एवं संबद्ध व्यवसाय की सालाना आय, गैर-कृषि गतिविधियां जैसे कि उत्पादन, व्यापार और सेवाओं आदि की आय, यदि परिवार में कोई और सदस्य नौकरी करता हो तो उसकी आय, कृषि और गैर-कृषि व्यवसाय में मजदूरी से प्राप्त होने वाली आय, सरकार योजनाओं के लाभ से प्राप्त राशि और कमीशन एवं मानद वेतन से प्राप्त आय जैसे विवरणों को ध्यान में रखा जाता है।
गुजरात में 7.9 लाख से अधिक महिलाओं ने कराया पंजीकरण-
गुजरात में इस योजना के अंतर्गत 7,98,333 महिलाओं ने पंजीकरण कराया है। इनमें से 7,66,743 महिलाएं कृषि आधारित रोजगार से जुड़ी हुई हैं, जबकि अन्य महिलाएं गैर-कृषि क्षेत्रों जैसे हस्तकला, उत्पादन, सेवाएं और अन्य छोटे-मोटे व्यवसायों से आय अर्जित कर रही हैं।
आदिवासी बहुल जिलों में 30 हजार से अधिक लखपति दीदी-
गुजरात में इस योजना को व्यापक समर्थन मिल रहा है और महिलाएं विभिन्न क्षेत्रों में अपने कौशल के बूते आगे बढ़ रही हैं। नवसारी, वलसाड और डांग जिले में 1,06,823 महिलाओं की पहचान की गई है और 30,527 महिलाओं की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है।
तापी जिले में वनश्री रेस्टोरेंट का टर्नओवर 41 लाख रुपये के पार-
तापी जिले की व्यारा तहसील के करंजवेल गांव में रमीलाबेन पुरुषोत्तमभाई गामित सखी मंडल की दस महिलाओं के साथ मिलकर वनश्री रेस्टोरेंट का संचालन करती हैं। सरकार की ओर से उन्हें रेस्टोरेंट के लिए स्थान और उपकरण-संसाधन आदि प्रदान किए गए थे। रमीलाबेन ने बताया, “हम पिछले चार वर्षों से यह रेस्टोरेंट चला रही हैं। हमें किराना सहित अन्य आवश्यक सामानों के लिए 50 हजार रुपये का ऋण मिला था। अब तक हमने वह ऋण भी चुका दिया है। हम अपने रेस्टोरेंट में पारंपरिक आदिवासी व्यंजन परोसते हैं। इससे हम प्रतिमाह साढ़े तीन से चार लाख रुपये तक की आय अर्जित करते हैं। वर्ष 2023 में हमारा टर्नओवर 40 लाख रुपये था, जो 2024 में बढ़कर 41 लाख 88 हजार रुपये हो गया है। इस कार्य के लिए हमें उचित मार्गदर्शन दिया गया है। आय बढ़ने से हमारे परिवार को काफी फायदा हुआ है।”
124 मास्टर ट्रेनरों ने 10 हजार से अधिक लोगों को दिया प्रशिक्षण-
इस योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए गुजरात सरकार ने कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। तहसील स्तर पर 124 मास्टर ट्रेनरों की नियुक्ति की गई है, जिन्होंने अब तक 10 हजार से अधिक कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन्स को प्रशिक्षण दिया है। ये कम्यूनिटी रिसोर्स पर्सन्स स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सहयोग प्रदान करेंगे। इस समग्र प्रक्रिया के लिए डिजिटल आजीविका रजिस्टर पर डेटा अपडेट किया जाता है, जो निगरानी के साथ-साथ महिला उद्यमियों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग एवं बाजार संपर्क उपलब्ध कराने में सहायक होता है।
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(Udaipur Kiran) / बिनोद पाण्डेय
