
अशोकनगर,20 मार्च (Udaipur Kiran) । बुधवार को रंगपंचमी पर करीला मंदिर आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सीढिय़ों के टूटने से नीचे गिर पड़े थे, जिन्हे सुरक्षाकर्मियों ने संभाल कर चोट लगने से बचाया था। इस घटना को मुख्यमंत्री की सुरक्षा में बढ़ी चूक माना गया है। इसे लेकर राजधानी भोपाल में भी हलचल है। यही वजह रही कि गुरुवार को मेला समापन होते ही भोपाल से पुलिस महानिरीक्षक अंशुमान यादव करीला मंदिर पहुंचे और इस हादसे के कारणों की जांच की। इस दौरान ग्वालियर पुलिस महानिरीक्षक अरविंद सक्सेना भी उनके साथ पूरे समय मौजूद रहे। दोनों अधिकारियों ने जिले के कलेक्टर सुभाष कुमार द्विवेदी एवं पुलिस अधीक्षक विनीत कुमार जैन से भी चर्चा की। जांच अधिकारी बनकर आए आईजी यादव कई घंटों तक करीला में रुके।
भोपाल से आए पुलिस महानिरीक्षक अंशुमन यादव का कहना था कि यह सुरक्षा का मुद्दा है और जिसके कारण मैं यहां आया था। हमने सभी पहलुओं पर जांच की है। अधिकारियों से भी तत्कालीन परिस्थिति पर चर्चा की है। मौका मुआयना भी किया है। जल्द ही जांच पूरी होगी। इस दौरान उन्होंने व्हीआईपी मार्ग का भी जायजा लिया। साथ ही जहां सीढिय़ां टूटी थीं, उस स्थान का भी बारीकी से मौका मुआयना किया।
दरअसल, बुधवार को जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मां जानकी के दर्शन करने के बाद जैसे ही सीढिय़ों से नीचे उतर रहे थे तो उन्हे पत्रकारों ने चर्चा करने के लिए रोक लिया। मुख्यमंत्री पत्रकारों से चर्चा कर रही रहे थे कि लोहे के पाईपों से बनी हुई यह सीढिय़ां एकाएक टूट कर गिर पड़ीं। इस दौरान सीढिय़ों पर प्रभारी मंत्री राकेश शुक्ला, मुंगावली विधायक बृजेन्द्र सिंह यादव, पूर्व सांसद डॉ. केपी यादव, जिपं अध्यक्ष अजय प्रताप सिंह यादव समेत करीब दो दर्जन अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि मौजूद थे। गनीमत रही कि मुख्यमंत्री सीढ़ी के सबसे नीचे वाले पायदान पर थे, जिससे उन्हे चोट नहीं आई और उन्हे सुरक्षाकर्मियों ने संभाल लिया। हालांकि इस दुर्घटना में मुख्यमंत्री के पांव में जरूर मोंच आई है। मुख्यमंत्री सुरक्षा की बड़े स्तर पर तैयारी होती है। इसके बाद भी इसमें चूक होने के कारण जिले के बढ़े अधिकारियों पर गाज गिर सकती है।
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(Udaipur Kiran) / देवेन्द्र ताम्रकार
