
लखनऊ, 22 मार्च (Udaipur Kiran) । बिहार राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर शनिवार काे राजभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन में समारोह का आयोजन हुआ। इस मौके पर कलाकारों ने बिहार राज्य के लोकगीतों और लोक नृत्यों पर शानदार प्रस्तुतियां दीं, जिन्हें राज्यपाल ने सराहा। उन्होंने बिहार राज्य के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि ।
इस अवसर पर बिहार की धार्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती हुई डाक्यूमेंट्री तथा प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के वैभव व वर्तमान पुननिर्मित नालंदा विश्वविद्यालय के स्वरूप पर आधारित डाक्यूमेंट्री का भी प्रदर्शन किया गया। बिहार के खान-पान, रहन-सहन, पर्व, मेले, विविध पर्यटन स्थल, ऐतिहासिक-सांस्कृतिक स्थल व अनूठी विशेषताओं पर आधारित प्रदर्शनी एवं रंगोली का भी प्रदर्शन किया गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने बिहार के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को उजागर करते हुए कहा कि प्राचीन काल में बिहार शिक्षा और संस्कृति के मामले में विश्व प्रसिद्ध था। उन्होंने कहा कि बिहार शिक्षा, राजनीति, शोध के क्षेत्र में अग्रणी राज्य है। भगवान श्रीराम का ससुराल भी बिहार में ही था। नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्रसिद्ध विश्वविद्यालयों की बिहार में अवस्थिति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह राज्य राजा जनक, चाणक्य, चन्द्रगुप्त मौर्य, विश्वामित्र, भगवान बुद्ध, भगवान महावीर और गुरु गोविन्द सिंह की पवित्र धरती है।
राज्यपाल ने नालंदा विश्वविद्यालय की प्रशंसा करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय में 10 हजार विद्यार्थियों द्वारा पढ़ाई की जाती थी। यहां का पुस्तकालय ज्ञान का भण्डार था। उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय के पुनर्निर्माण को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके अद्भुत शैक्षिक मॉडल की सराहना की।
राज्यपाल ने देश की नदियों को पुनर्जीवित किये जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि हमारा दायित्व होना चाहिए कि आगामी पीढ़ियों को शुद्ध मिट्टी, शुद्ध पानी, शुद्ध हवा तथा पेड़-पौधे उपलब्ध हो सकें। उन्होंने गुजरात में सरस्वती नदी के पुनर्जीवन का उदाहरण दिया, जो तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों से संभव हुआ जब नर्मदा नदी का पानी सरस्वती नदी में डाला गया।
इस अवसर पर राज्यपाल ने सरकार द्वारा चलाई गई अमृत सरोवर योजना के माध्यम से प्राकृतिक व प्राचीन तालाबों के जीर्णोद्धार व मनरेगा योजना और इसके तहत किए गए कार्यों की सराहना की, विशेष रूप से गरीबों को मिले लाभ के बारे में चर्चा की। उन्होंने भारत की प्राचीन वैज्ञानिक उपलब्धियों, जैसे शून्य की खोज और विमान डिजाइन के बारे में भी बताया और कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान दुनिया में अग्रणी था।
(Udaipur Kiran) / डॉ. जितेन्द्र पाण्डेय
