Maharashtra

अंतर्राष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस पर ठाणे में महिला न्यायाधीशों का सम्मान

मुंबई, 19मार्च ( हि.स.) ।. यद्यपि प्राचीन काल से ही महिलाओं पर हिंसा होती रही है, किन्तु हाल के दिनों में यह अधिक क्रूर हो गई है। आज का मनुष्य दो-चार साल की बच्चियों पर भी अमानवीय अत्याचार करता नजर आता है। इसलिए, आज की मानव यात्रा किस ओर जा रही है, यह सवाल उठाते हुए, न्यायाधीश ईश्वर सूर्यवंशी ने ठाणे में अंतर्राष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस के अवसर पर चिंता व्यक्त की कि आज रावण के कृत्यों से भी बढ़कर कृत्य हो रहे हैं। इस अवसर पर 17 महिला न्यायाधीशों को सम्मानित किया गया।

ठाणे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से मुख्य जिला व सत्र न्यायाधीश तथा विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्रीनिवास अग्रवाल के मार्गदर्शन में ठाणे जिला परिवार न्यायालय में 12वा अंतरराष्ट्रीय महिला न्यायाधीश दिवस मनाया गया। इस अवसर पर ठाणे न्यायालय की 17 महिला न्यायाधीशों का विधिवत सम्मान किया गया तथा महिला दिवस के अवसर पर जिला न्यायालय की महिला वकीलों और महिला कर्मचारियों को भी सम्मानित किया गया। इस अवसर पर कुटुंब न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश एन.ए.कांक, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश आर.यू.मालवणकर, तदर्थ जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश वी.एल.भोसले, सिविल न्यायाधीश वरिष्ठ स्तर पी.डी.मोरे, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी एस.के.फोकामारे, कुटुंब न्यायाधीश ए.वी.अलंगे तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव न्यायाधीश ईश्वर सूर्यवंशी मंच पर उपस्थित थे। न्यायाधीश मालवणकर ने इस मौके पर बढ़ते बाल यौन शोषण पर चिंता व्यक्त की। न्यायाधीश अलांगे ने महिला अधिकारों पर अपने विचार व्यक्त किए। पारिवारिक न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश कांक ने कहा कि महिलाएं सशक्त हैं, लेकिन उनके अधिकारों की रक्षा और सख्ती से अनुमोदन की जरूरत है। प्रथम श्रेणी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट फोकमारे ने महिलाओं की उपलब्धियों पर अपने विचार व्यक्त किए।

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(Udaipur Kiran) / रवीन्द्र शर्मा

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