Maharashtra

टीएमसी में करोड़ों का भ्रष्टाचार, एनसीपी के बाद बीजेपी के केलकर ने जांच की मांग

मुंबई,18 मार्च ( हि . स.) । ठाणे में एक डेवलपर ने म्हाडा को सौंपे बिना ही 31 फ्लैट हड़प लिए हैं और उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है,। ठाणे एनसीपी एपी के आरोपों के बाद अब बीजेपी विधायक संजय केलकर ने मनपा में सैकड़ों करोड़ के भ्रष्टाचार की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए आरोप लगाया कि मनपा और म्हाडा प्रशासन ने पिछले तीन वर्षों में उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की है।

विधायक संजय केलकर ने ठाणे शहर की विभिन्न समस्याओं के साथ-साथ मनपा में व्याप्त भ्रष्टाचार पर जोरदार तरीके से आवाज उठाते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की। जिन डेवलपर्स ने चार हजार वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल में इमारतें बनाई हैं, उन्हें क्षेत्रफल का 20 प्रतिशत फ्लैट म्हाडा को उपलब्ध कराना होगा। हालांकि, ठाणे स्थित दर्शन सागर डेवलपर्स ने अभी तक 31 फ्लैट म्हाडा को नहीं सौंपे हैं। इस संबंध में 20 मार्च 2022 को कासरवडावली पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया है। हालांकि, विधायक संजय केलकर ने दोनों प्रशासनों की भूमिका पर संदेह व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि पिछले तीन वर्षों में नगर निगम और म्हाडा प्रशासन ने डेवलपर के खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं की।

ठाणे नगर निगम को विभिन्न माध्यमों से विभिन्न विकास कार्यों के लिए 700-800 करोड़ रुपये की धनराशि प्राप्त हुई। लेकिन क्या ये कार्य किये गये? क्या काम दिखाए बिना ही बिल जारी कर दिए गए? विधायक केलकर का दावा है कि उन्होंने सदन में ऐसे सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि नगर निगम में सैकड़ों करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार हुआ है और इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग मुख्यमंत्री से की गई है।

सफाई कर्मचारियों को उत्तराधिकार में नौकरी का लाभ मिले, यह सुनिश्चित करने के प्रयास सफल रहे, लेकिन विधायक केलकर ने सदन का ध्यान इस ओर दिलाया कि सफाई कर्मचारियों के उत्तराधिकारियों को नौकरी देने में अभी भी बाधाएं हैं। उन्होंने मांग की कि यह लाभ फाइलेरिया विभाग को भी दिया जाए। विधायक केलकर ने बताया कि सफाई कर्मचारियों ने कोविड काल में निस्वार्थ भाव से काम किया, लेकिन उन्हें भत्ता तक नहीं मिला।

वर्तमान में ठाणे के हर विभाग में कचरा पड़ा हुआ है। ठोस अपशिष्ट की समस्या गंभीर हो गयी है। बीजेपी नेता केलकर ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब शहर में दो मंत्री हैं तो यह मुद्दा क्यों उठना नही चाहिए, उन्होंने सुझाव दिया कि जनप्रतिनिधियों को विश्वास में लेकर उनसे चर्चा कर इसका हल निकाला जाना चाहिए।

पिछले 10-15 वर्षों से सड़क चौड़ीकरण के कारण प्रभावित नागरिक अपने वैध घरों और जमीन से वंचित हो रहे हैं। दूसरी ओर, इससे गलत लोगों को लाभ मिला है। एमएलए केलकर ने मांग की कि नगर निगम प्रशासन को इस संबंध में श्वेत पत्र जारी करना चाहिए। एक ओर जहां बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ों की कटाई हो रही है, वहीं दूसरी ओर आवासीय परिसरों के भीतर पेड़ों की शाखाओं की छंटाई की जिम्मेदारी सोसायटियों पर डाल दी गई है। केलकर ने मांग की कि यह व्यय सोसायटियों द्वारा वहन नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि नगर निगम को इस कटौती की पूर्ति के लिए चार से पांच करोड़ रुपए का प्रावधान करना चाहिए। वेदरशेड का मुद्दा अभी भी लंबित है और शहर की लगभग 70-75 सोसायटियों ने इस संबंध में आवेदन प्रस्तुत किए हैं।

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(Udaipur Kiran) / रवीन्द्र शर्मा

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