
जयपुर, 17 मार्च (Udaipur Kiran) । राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में बजरी चोरी, अवैध खनन व परिवहन सहित बजरी माफियाओं से जुडे मामलों में सीबीआई को कहा है कि वह चाहे तो इन केसों में अनुसंधान के लिए सीआरपीएफ या अन्य जांच एजेंसियों से भी मदद ले सकती है। वहीं सीबीआई अवैध बजरी खनन व बजरी माफियाओं से जुडे जितने केसों में अनुसंधान करना चाहे, वह उसके लिए फ्री है। अदालत ने राज्य सरकार की एजेंसियों को सीबीआई का सहयोग करने को कहा है। वहीं अदालत ने पूर्व लीज धारक की ओर से मामले में पक्षकार बनने वाली अर्जी भी खारिज कर दी। जस्टिस समीर जैन ने यह आदेश बजरी चोरी के मामले में आरोपी जब्बार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अवैध बजरी खनन व खनन माफियाओं के कारण पुलिस वाले मर रहे हैं, लेकिन राज्य सरकार को इसकी कोई भी परवाह नहीं है। पूरा सिस्टम ही भगवान भरोसे चल रहा है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार को मामले में की गई कार्रवाई का ब्यौरा पेश करने के लिए 2 अप्रैल तक का समय दिया है। पिछली सुनवाई पर सीबीआई की ओर से संसाधनों की कमी का हवाला देते हुए बनास व चंबल के आसपास बजरी खनन से जुडे करीब 416 मामलों में अनुसंधान करने में असमर्थता जताई थी। जिस पर अदालत ने सीबीआई के निदेशक को व्यक्तिगत या वीसी के जरिए पेश होकर यह बताने के लिए कहा था कि इन मामलों में क्या अनुसंधान चल रहा है और अदालत के आदेश की इतनी लंबी अवधि होने के बाद भी अवैध बजरी खनन व माफियाओं के खिलाफ उन्होंने उचित कार्रवाई क्यों नहीं की।
गौरतलब है कि अप्रैल, 2024 को अदालत ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपते हुए कहा था कि स्वतंत्रता दी थी वह बनास और चंबल नदी में अवैध खनन व परिवहन से जुडे मामलों में दर्ज एफआईआर की जांच भी कर सकती है।
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(Udaipur Kiran)
