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राजधानी 27-29 सितंबर को आयोजित होने वाले 14वें एमएमएमएम एक्सपो की मेजबानी को तैयार

एमएमएमएम के लोगो का फाइल फोटो

नई दिल्ली, 23 सितंबर (Udaipur Kiran) । राजधानी नई दिल्‍ली खनिज, धातु, धातुकर्म और सामग्री (एमएमएमएम) पर आयोजित होने वाले सबसे बड़े ट्रेड शो 14वें एक्सपो की मेजबानी करने के लिए तैयार है। एमएमएमएम पर अंतरराष्‍ट्रीय प्रदर्शनी 27 से 29 सितंबर, 2024 तक इंडिया इंटरनेशनल कन्वेंशन एंड एक्सपो सेंटर (आईआईसीसी), यशोभूमि में आयोजित किया जाएगा। यह भारत में मिनरल्स, मेटल्स, मेटलर्जी और मैटेरियल्स का सबसे बड़ा आयोजन होगा।

हाइव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक गगन साहनी ने सोमवार को 14वें एमएमएमएम एक्सपो की तैयारियों की जानकारी देते हुए कहा कि इसके हर संस्करण के उपरांत इसके प्रोफाइल की अहमियत दिन-ब-दिन बढ़ती ही जा रही है। उन्‍होंने बताया कि आगंतुकों की संख्या और व्यावसायिक लेन-देन की मात्रा के मामले में इसने हर बार एक नई मिसाल कायम की है। साहनी ने कहा कि सम्मिलित रूप से होने वाले इसके आयोजन में 10 से अधिक देशों के 300 से ज्‍यादा प्रदर्शक भाग लेंगे। इसके साथ ही यहां दक्षिण एशिया से 12 हजार से अधिक खरीदार आएंगे।

गगन साहनी ने कहा कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स-दिल्ली चैप्टर के साथ मिलकर और वर्ल्ड मेटल फोरम (डब्‍ल्‍यूएमएफ) के सक्रिय सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। उन्‍होंने कहा कि एमएमएमएम 2024 में चीन, यूरोपीय देशों और रूस के लिए अलग-अलग पवेलियन बनाए जाएंगे। साहनी ने बताया कि नई दिल्ली में 27 से 29 सितंबर, 2024 के दौरान आयोजित 14वें संस्करण में संयुक्त उद्यमों, साझेदारियों, निवेश तथा टेक्नोलॉजी के आदान-प्रदान तथा बड़े पैमाने पर होने वाली डील्स से देश में मिनरल्स, मेटल्स, मेटलर्जी और मैटेरियल्स क्षेत्रों के विस्तार और प्रगति को बढ़ावा मिलेगा।

उन्‍होंने बताया कि एमएमएमएम 2024 एक्‍सपो में चीन, यूरोपीय देशों और रूस के लिए अलग-अलग पवेलियन बनाए जाएंगे। उन्हाेंने बताया कि यह अंतरराष्‍ट्रीय प्रदर्शनी दुनिया के लगभग सभी कोनों से आए दिग्गजों के साथ बातचीत करने, व्यापार को बढ़ावा देने और सस्टेनेबल टेक्नोलॉजी में नए रास्तों की तलाश करने का शानदार अवसर प्रदान करेगा। साहनी ने कहा कि वित्त वर्ष 2023 के दौरान विमानन, भारी इंजीनियरिंग, मोटर-वाहन, कृषि और निर्माण अथवा इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रगति की वजह से भारत के विनिर्माण क्षेत्र में 4.7 फीसदी की वृद्धि हुई।

(Udaipur Kiran) / प्रजेश शंकर

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