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पतंजलि विवि में 62वीं अखिल भारतीय शास्त्रीय स्पर्धा का शुभारंभ

अतिथि
पतंजलि में शास्त्रीय स्पर्धा

हरिद्वार, 18 मार्च (Udaipur Kiran) । पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार में मंगलवार को 62वीं अखिल भारतीय शास्त्रीय स्पर्धा का शुभारंभ हुआ। इस स्पर्धा में देश के 30 राज्यों एवं केन्द्रशासित प्रदेशों के 1500 विद्यार्थी और मार्गदर्शक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम में देशभर से आए संस्कृत प्रेमी विद्वानों ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा के संरक्षण और संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नई दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने की। कार्यक्रम का आयोजन 21 मार्च तक किया जाएगा।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता, विज्ञान और संस्कृति का अद्भुत संगम है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से हम इस अमूल्य धरोहर को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में सफल होंगे।

केन्द्रीय संस्कृत विवि के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि संस्कृत भाषा केवल एक संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। इसके संवर्धन के लिए युवा पीढ़ी का योगदान अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह अखिल भारतीय शास्त्रीय स्पर्धा संस्कृत भाषा के संरक्षण और प्रचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मंच है। इस प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को वैदिक साहित्य, दर्शन, व्याकरण, न्याय, ज्योतिष, साहित्य और संगीत जैसी विविध विधाओं में न केवल अपने ज्ञान का प्रदर्शन करने का अवसर प्राप्त होता है, वरन वे एक-दूसरे से सीखकर संस्कृत के गूढ़ रहस्यों में भी निपुण बनेंगे। इस स्पर्धा के माध्यम से संस्कृत के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और नई पीढ़ी में इस अमूल्य भाषा के प्रति रुचि और सम्मान उत्पन्न होगा। 62वीं अखिल भारतीय शास्त्रीय स्पर्धा का यह आयोजन न केवल संस्कृत भाषा के गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी है।

इस अवसर पर महर्षि पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सी.जी. विजय कुमार और संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए संस्कृत के महत्व पर अपने विचार साझा किए। भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष एन.पी. सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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(Udaipur Kiran) / डॉ.रजनीकांत शुक्ला

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