
पूर्वी चंपारण, 19 मार्च (Udaipur Kiran) । जिले के पीपराकोठी स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के अटल सभागार में पौधा किस्म और कृषक अधिकार संरक्षण विषय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यक्रम एवं प्रदर्शनी बुधवार को संपन्न हुई। अतिथियों का स्वागत पुष्प गुच्छ, शाल भेंट कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केविके के प्रधान वैज्ञानिक डा. अरविन्द कुमार सिंह ने किया।
डीएओ मनीष कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान में हम रसायनिक खाद व उन्नत प्रभेद के बीजो का उपयोग कर उत्पादन में भले ही वृद्धि कर लिये हो,लेकिन आज भी पारम्परिक मोटे अनाज, फल, फूल एवं सब्जियों का उत्पादन हो रहा हैं जिसमें कुछ न कुछ औषधीय गुण हुआ करते हैं। उन फसलों का उत्पादन धीरे धीरे कम होने लगा। बहुत से लोग आज भी वैसे फसलों का उत्पादन किया करते हैं लेकिन इसकी जानकारी ना ही सरकार को हैं और ना ही विभाग को ही हैं. और उन विलुप्त हो रहे फसलों के बढ़ावा को लेकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया हैं।
केविके प्रमुख डा. अरविन्द कुमार सिंह कहा कि हमारे पुरखो द्वारा उत्पादित फसल में गुणवत्ता हुआ करती थी। उसे आज भी विकसित करने की जरुरत हैं। किसानों को उनका उचित अधिकार प्राप्त हो इसके लिए सरकार ने पीपीभीएफआरए को लागू किया गया, जिसमें परम्परागत 158 प्रकार के फसलों को शामिल किया गया। और उन्हें शोध कर विकसित किया गया हैं। यहां के किसान भी परम्परागत खेती किया करते हैं। प्रदर्शनी में करीब 150 किसानों ने अपने खेतों से उत्पादित पारम्परिक मोटे अनाजो के बीज को लाया। उनके अनाजों को पंजीकरण कर पैकिंग किया गया, जिसे केविके पीपीभीएफआरए को भेजेगी। इस दौरान कोटवा के प्रयाग सिंह, रमाकांत, दिनबंधु गुप्ता कल्याणपुर सहित 33 किसानों को मोटे अनाज के उत्पादन के लिए प्रशस्ती पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।
मौके पर वैज्ञानिक डा.अर्णव कुंडू, डा.गायत्री कुमारी पाढ़ी, डा.सविता कुमारी डा. आरबी शर्मा, राजेश्वर सिंह, जयशंकर सिंह, मनोरंजन सिंह, रामनरेश गिरी, राजन शर्मा, राजेश कुमार यादव, भारत भूषण सिंह, सहित अन्य वैज्ञानिक व किसान मौजूद थे।
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(Udaipur Kiran) / आनंद कुमार
