Uttar Pradesh

मोर्थ की ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ पहल को लेकर उत्तर प्रदेश सक्रिय

–परिवहन आयुक्त ने जिलाधिकारियों को समयबद्ध कार्यक्रम के लिए भेजा पत्र

–देश के 100 जनपदों में होगा क्रियान्वयन, यूपी के 28 जनपद चयनित

लखनऊ, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (मोर्थ) व युवा कार्य-खेल मंत्रालय के सहयोग से ‘सड़क सुरक्षा मित्र (एसएसएम)’ कार्यक्रम प्रारम्भ किया जा रहा है। इसका उद्देश्य MYBharat प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से युवाओं को सड़क-सुरक्षा हस्तक्षेपों में संगठित रूप से जोड़ना है। इसके लिए अनुमोदित कॉन्सेप्ट नोट व रोडमैप राज्यों/जनपदों को प्रेषित किए गए हैं। प्रथम चरण में देश के 100 चयनित जनपदों में क्रियान्वयन होगा। सम्बंधित जिलाधिकारियों से युवाओं के समन्वित जुड़ाव व प्रगति-रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है। परिवहन आयुक्त ने मंगलवार को सभी जिलाधिकारियों को पत्र जारी कर एसएसएम कार्यक्रम के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए डीआरएससी के माध्यम से नोडल व्यवस्था, MYBharat ऑनबोर्डिंग, स्वयंसेवक चयन-प्रशिक्षण एवं मासिक केपीआई-आधारित समीक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।

–स्वयंसेवक के रूप में चयनित किए जाएंगे 18 से 25 वर्ष के युवा

18–28 वर्ष के उसी जनपद के युवा, जिनके विरुद्ध कोई यातायात चालान लम्बित न हो, वे चुने जाएंगे। सामान्य स्वयंसेवकों के लिए 1 सप्ताह का प्रशिक्षण (फ़र्स्ट-एड सहित) और सिविल इंजीनियर स्नातकों के लिए 15 दिन का रोड सेफ़्टी ऑडिट प्रशिक्षण निर्धारित है। इनकी भूमिकाएं—क्रैश-सीन समन्वय, रोड सेफ़्टी ऑडिट/ब्लैक-स्पॉट अध्ययन, जागरूकता एवं एंगेजमेंट के साथ EDAR, Sanjaya, Field Perception Survey जैसे टूल्स का उपयोग अनिवार्य रहेगा। उत्कृष्ट कार्य पर प्रमाण-पत्र व Good Samaritan मान्यता/पुरस्कार का भी प्रावधान है।

–जिला सड़क सुरक्षा समिति करेगी कार्यक्रम की देखरेख

धारा 215B, मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत प्रत्येक जनपद में जिला सड़क सुरक्षा समिति (डीआरएससी) कार्यक्रम की देख-रेख करेगी। SCCoRS (29.03.2022) के निर्देशानुसार एसएसएम को डीआरएससी में co-opt किया जा सकता है। मोर्थ के रोडमैप में टी1–टी12 के स्पष्ट माइलस्टोन्स (जैसे DM का MYBharat पर ऑनबोर्डिंग, डीआरएससी बैठक, ईएलपी प्रकाशन, प्रशिक्षण एवं फ़ील्ड एंगेजमेंट) निर्दिष्ट हैं। कार्यक्रम के अंत में डीएम की ओर से मोर्थ व SCCoRS को समरी रिपोर्ट प्रेषित की जाएगी।

परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह ने बताया कि शून्य जोखिम व शून्य घर्षण की नीति पर चलते हुए सड़क सुरक्षा मित्र युवाओं की ऊर्जा को सड़क-सुरक्षा के ठोस परिणामों में बदलने का राष्ट्रीय प्रयास है। भारत सरकार एवं प्रदेश शासन चाहता है कि हर जिला समयबद्ध तरीके से डीआरएससी के माध्यम से क्रैश-सीन मैनेजमेंट, ब्लैक-स्पॉट ऑडिट और जागरूकता की संयुक्त कार्ययोजना लागू करे, ताकि दुर्घटनाएँ व मृत्यु-दर घटे, प्रतिक्रिया-समय सुधरे और नागरिकों की सुरक्षा बढ़े।

–उत्तर प्रदेश के चयनित 28 जनपद (मोर्थ सूची के अनुसार):

कानपुर नगर, बुलंदशहर, प्रयागराज, आगरा, उन्नाव, हरदोई, मथुरा, अलीगढ़, फतेहपुर, लखनऊ, सीतापुर, बरेली, गोरखपुर, कुशीनगर, बाराबंकी, जौनपुर, बदायूँ, बिजनौर, गौतमबुद्धनगर, सहारनपुर, आज़मगढ़, मैनपुरी, फ़िरोज़ाबाद, रायबरेली, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी, शाहजहांपुर, बस्ती।

–अपेक्षित प्रभाव:

संरचित प्रशिक्षण, फील्ड-स्टडी और डेटा-आधारित रिपोर्टिंग से दुर्घटनाओं/गंभीर चोटों में कमी, आपात प्रतिक्रिया व साइट प्रबंधन में सुधार, तथा युवा-जन सहभागिता बढ़ेगी—जिससे दीर्घकाल में जिलास्तरीय सड़क-सुरक्षा तंत्र सुदृढ़ होगा।

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(Udaipur Kiran) / मोहित वर्मा

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