नई दिल्ली, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । ऑल इंडिया बार एसोसिएशन (एआईबीए) के चेयरमैन डॉ. आदीश सी. अग्रवाल ने 18 सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा जारी उस वक्तव्य की कड़ी निंदा की है, जिसमें उन्होंने उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार न्यायमूर्ति बी. सुदर्शन रेड्डी को लेकर गृहमंत्री की टिप्पणियों की आलोचना की है।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके डॉ. आदीश ने कहा कि जब कोई सेवानिवृत्त न्यायाधीश स्वेच्छा से राजनीति में प्रवेश करता है तो वह अब न्यायिक पद की विशेष छवि और प्रतिरक्षा का दावा नहीं कर सकता। ऐसे में उसे अपने राजनीतिक निर्णयों और कार्यों पर न्यायोचित आलोचना का सामना करना ही होगा।
उन्होंने कहा कि गृहमंत्री की टिप्पणियां न तो व्यक्तिगत थीं और न ही अपमानजनक, बल्कि यह समयानुकूल स्मरण कराती हैं कि न्यायाधीशों को अपने कार्यकाल के दौरान सदैव यह ध्यान रखना चाहिए कि उनके आदेश और निर्णय देश की एकता, अखंडता, सुरक्षा या संप्रभुता से कभी समझौता न करें।
डॉ. अग्रवाल ने कहा, “न्यायिक स्वतंत्रता सर्वोपरि है, परंतु यह भी उतना ही सत्य है कि न्यायिक निर्णय अदालत की चारदीवारी से परे जाकर दूरगामी परिणाम उत्पन्न करते हैं, विशेषकर तब जब वे राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े हों। कुछ सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा एक वरिष्ठ संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति की निष्पक्ष टिप्पणी को राजनीतिक रंग देना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह न्यायपालिका की निष्पक्षता पर जनता का भरोसा कमजोर करता है।”
ऑल इंडिया बार एसोसिएशन के रुख को दोहराते हुए उन्होंने कहा, “हम न्यायिक जवाबदेही, राष्ट्रीय सुरक्षा और इस सिद्धांत के पक्षधर हैं कि कोई भी व्यक्ति − चाहे वह न्यायाधीश हो, राजनीतिज्ञ हो या जन-प्रतिनिधि− न्यायोचित आलोचना से ऊपर नहीं है।”
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(Udaipur Kiran) / विजयालक्ष्मी
