श्रीनगर, 28 अगस्त (Udaipur Kiran) । गुरुवार दोपहर शहर-ए-ख़ास में आस्था की लहर दौड़ गई जब हज़ारों श्रद्धालु नौहट्टा स्थित हज़रत नक्शबंद साहिब (आरए) दरगाह पर वार्षिक ‘खोजा दीगर’ की नमाज़ अदा करने के लिए एकत्रित हुए।
संकरी गलियों से लेकर मुख्य चौक तक, घाटी भर से पुरुष, महिलाएँ और बच्चे विशेष वार्षिक नमाज़ अदा करने के लिए उमड़ पड़े।
जैसे ही घड़ी ने दोपहर 3 बजे का समय छुआ, श्रद्धालु आने लगे, नमाज़ की चटाई बिछाकर विशेष नमाज़ में शामिल होने का इंतज़ार करने लगे।
श्रीनगर के गुलाम अहमद जो वर्षों से इस दरगाह पर आते रहे हैं ने कहा किमेरे लिए यह जगह इतनी शांतिपूर्ण है कि जब मैं यहाँ नमाज़ अदा करता हूँ खासकर वार्षिक खोजा दीगर के दौरान तो मेरा दिल सुकून से भर जाता है।
बडगाम के बुज़ुर्ग निवासी गुलज़ार अहमद ने बताया कि वह बचपन से ही यहाँ आते रहे हैं। उन्होंने कहा किमेरी माँ मुझे यहाँ लाई थीं और अब मैं अपने पोते-पोतियों को भी यहाँ लाता हूँ। इस प्रार्थना ने हमें जीवन के सबसे कठिन क्षणों में सहारा दिया है। आज मैं अपने परिवार के स्वास्थ्य और हमारी घाटी में शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ।
इसी तरह स्थानीय निवासियों ने भी अपने घरों के दरवाज़े आगंतुकों के लिए खोल दिए और उन्हें चाय-नाश्ता उपलब्ध कराया। नौहट्टा निवासी मुख्तार अहमद ने कहा किखोजा दीगर के अवसर पर हम दरगाह के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए श्रद्धालुओं के लिए जलपान तैयार करते हैं। हमारे दरवाज़े सभी के लिए खुले हैं।
माताएँ अपने बच्चों का हाथ थामे हुए दिखाई दीं क्योंकि चौक श्रद्धालुओं से खचाखच भरा था। इस बीच प्रशासन ने नमाज़ के लिए सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की थी। गौरतलब है कि इस दरगाह का गहरा ऐतिहासिक महत्व है। 1640 में लाहौर में ख्वाजा ख्वांद महमूद की मृत्यु के बाद उनके पुत्र ख्वाजा मोइनुद्दीन नक्शबंदी दरगाह का प्रबंधन करने के लिए कश्मीर आए। उनका निधन 1674 में हुआ और उन्हें यहीं दफनाया गया। ऐसा भी माना जाता है कि पैगंबर मोहम्मद के पवित्र बालों का अवशेष पहली बार 1699 में इसी दरगाह पर रखा गया था।
(Udaipur Kiran) / SONIA LALOTRA
