Uttar Pradesh

गंगा का जलस्तर स्थिर, पर संकट बरकरार,पलायन को मजबूर तटवर्ती इलाके के लोग

गंगा में बाढ़ का नजारा
गंगा में बाढ़ का नजारा

— वरुणा और असि नदी के पलट प्रवाह से बाढ़ का पानी आबादी क्षेत्रों में घुसा

वाराणसी, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद में गंगा नदी का जलस्तर गुरुवार सुबह खतरे के निशान के करीब 71 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हो गया है। हालांकि जलस्तर में ठहराव आने के बावजूद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की परेशानियां कम नहीं हुई हैं। तटवर्ती इलाकों में पानी भरने के कारण लोग अपने घरों को खाली कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। बाढ़ राहत केंद्रों पर अब पलायन करने वाले लोगों की भीड़ लगातार बढ़ रही है।

केन्द्रीय जल आयोग के अनुसार, गुरुवार सुबह 8 बजे गंगा का जलस्तर 71.00 मीटर दर्ज किया गया, जबकि वाराणसी में खतरे का निशान 71.262 मीटर है। जलस्तर में वृद्धि तो थमी है, लेकिन स्थिति अब भी गम्भीर बनी हुई है। इधर, वरुणा और असि नदियों में हो रहे पलट प्रवाह से बाढ़ का पानी शहरी आबादी वाले क्षेत्रों में घुस आया है। जनपद के ढाब क्षेत्र के गांव और वरुणा नदी के किनारे बसे मोहल्ले बाढ़ की चपेट में हैं। गंगा के बढ़े जलस्तर ने प्रमुख घाटों को भी जलमग्न कर दिया है। दशाश्वमेध घाट स्थित शीतला माता मंदिर पूरी तरह पानी में डूब चुका है।

—मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर भी बाधित हुआ अंतिम संस्कार

मोक्षतीर्थ मणिकर्णिका घाट पर अब शवदाह ऊपरी प्लेटफॉर्म पर हो रहा है, और वहां तक पहुंचने के लिए लोगों को गलियों में नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। जलस्तर बढ़ने के कारण अंतिम संस्कार में तीन से चार घंटे तक का इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, हरिश्चंद्र घाट की गलियों में भी चिताएं लगाई जा रही हैं, जहां एक समय में अधिकतम तीन चिताएं ही सम्भव हो पा रही हैं।

—काशी विश्वनाथ धाम भी बाढ़ की चपेट में

बढ़ता जलस्तर अब श्री काशी विश्वनाथ धाम के गंगा द्वार तक पहुंचने ही वाला है, महज कुछ सीढ़ियां शेष रह गई हैं। स्थिति अगर यही बनी रही, तो धाम का प्रवेश द्वार भी जलमग्न हो सकता है।

—फसलें भी बर्बाद, ग्रामीण बेहाल

गंगा के तटवर्ती गांवों में सैकड़ों एकड़ में खड़ी फसलें पानी में डूब चुकी हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। ग्रामीण इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों को राहत कार्यों का बेसब्री से इंतजार है। गौरतलब है कि इस वर्ष यह दूसरा अवसर है जब गंगा ने चेतावनी बिंदु को पार किया है, जिससे स्थिति और भी चिंताजनक हो गई है।

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(Udaipur Kiran) / श्रीधर त्रिपाठी

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