जम्मू, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई परिवारों को बेघर और बेसहारा कर दिया है। इस संकट की घड़ी में जम्मू के होम फॉर द एज़्ड एंड इन्फर्म (वृद्धाश्रम) के बुजुर्ग निवासियों ने मानवीय करुणा और एकजुटता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हुए पीड़ित परिवारों की मदद का संकल्प लिया है। बुजुर्गों ने निर्णय लिया है कि वे अपने स्तर पर 500 भोजन पैकेट (दोपहर और रात के भोजन के लिए) तैयार कर बाढ़ प्रभावितों तक पहुँचाएंगे। वृद्धाश्रम के निवासियों ने कहा कि यह संस्था स्वयं समाज की उदारता और सहयोग से चलती है, इसलिए संकट के समय समाज के प्रति अपना नैतिक दायित्व निभाना उनका फर्ज है।
एक बुजुर्ग निवासी ने भावुक होकर कहा, हम भले ही उम्रदराज हो गए हों, लेकिन हमारे दिल आज भी समाज के दुख-दर्द को महसूस करते हैं। जब समाज ने हमें सहारा दिया तो आज जब लोग मुसीबत में हैं, हम चुप कैसे रह सकते हैं? यह हमारी ओर से एक छोटा-सा प्रयास है, उन लोगों का हाथ थामने का जिन्होंने हमें हमेशा संभाला है। बुजुर्ग, उम्र और शारीरिक सीमाओं के बावजूद, पूरे उत्साह से इस पहल में शामिल हो रहे हैं। कोई पैकेट तैयार कर रहा है, कोई वितरण में सहयोग कर रहा है, तो कोई आशीर्वाद देकर पीड़ितों के दुख को बांट रहा है। उनकी यह निःस्वार्थ सेवा न केवल पीड़ित परिवारों को सहारा दे रही है, बल्कि समाज को भी करुणा और मानवता का संदेश दे रही है।
वृद्धाश्रम की प्रबंध समिति ने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए अन्य संस्थाओं, दानदाताओं और नागरिकों से भी आगे आकर बाढ़ पीड़ितों की मदद करने की अपील की है। वृद्धाश्रम के इन बुजुर्गों का यह कदम साबित करता है कि दयालुता की कोई उम्र नहीं होती और मानव सेवा ही सच्चे आभार और प्रेम की सर्वोच्च अभिव्यक्ति है।
(Udaipur Kiran) / राहुल शर्मा
