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राज्य उपभोक्ता आयोग : एसबीआई एटीएम की दोषपूर्ण सेवाएं मानी

jodhpur

जोधपुर, 27 अगस्त (Udaipur Kiran) । स्टेट बैंक द्वारा स्थापित दोषपूर्ण एटीएम सेवा को लेकर राज्य उपभोक्ता आयोग जोधपुर पीठ ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया को जिम्मेदार मानते हुए दो अलग-अलग प्रकरणों में आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छवाहा, सदस्य न्यायिक निर्मल सिंह मेड़तवाल, सदस्य लियाकत अली ने उपभोक्ताओं के पक्ष मे निर्णय देकर उपभोक्ताओं को राहत प्रदान की।

एसबीआई रेलवे स्टेशन शाखा बनाम कैलाश सिंह :

इस प्रकरण में उपभोक्ता कैलाश सिंह ने जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय जोधपुर के फैसले के विरुद्ध एसबीआई रेलवे स्टेशन शाखा के विरुद्ध परिवाद में बताया था कि उपभोक्ता द्वारा एसबीआई की शाखा में स्थापित एटीएम से 15000 की राशि निकालने का प्रयास किया परंतु कोई राशि नहीं निकली। कुछ समय बाद पुन: 15000 की राशि निकालने का प्रयास किया परंतु दूसरी मशीन पर भी राशि नहीं निकली। बैंक के कर्मचारियों ने 28000 रुपए निकाले जाने की जानकारी दी। परिवादी ने टोल फ्री नंबर पर भी शिकायत दर्ज करवाई लेकिन शिकायत का समाधान नहीं किया तथा घटना के वीडियो फुटेज उपलब्ध करवाने का निवेदन किया। विपक्षी बैंक ने वीडियो फुटेज व नोटों की डिटेल परिवादी को उपलब्ध नहीं करवाई। परिवादी ने बैंक की सेवा में त्रुटि मानते हुए जिला आयोग में परिवाद प्रस्तुत कर राशि दिलवाने की मांग की। बैंक की ओर से जवाब देते हुए बताया कि एटीएम पर ट्रांजैक्शंस पूरा हुआ तथा 28000 रुपए एटीएम से निकले। परिवादी ने वीडियो फुटेज मांगे थे, परंतु बैंक इस प्रकार फुटेज नहीं दे सकती है। पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करवाने पर पुलिस को फुटेज दी जा सकती है। जिला आयोग ने उपभोक्ता की शिकायत को सही मानते हुए परिवाद स्वीकार किया। निर्णय के विरुद्ध राज्य उपभोक्ता आयोग जोधपुर पीठ के समक्ष स्टेट बैंक आफ इंडिया ने अपील प्रस्तुत कर जिला आयोग के निर्णय को अस्वीकार करने की प्रार्थना की।

आयोग ने बैंक के अधिवक्ता की बहस सुनकर अपने निर्णय में कहा कि बैंक के पास पर्याप्त अवसर था कि वह वीडियो फुटेज के जरिए यह साबित कर सकता था कि एटीएम से उस वक्त राशि निकली है वह राशि हुलिया पहचान कर पता लगाया जा सकता था कि उक्त राशि का आहरण स्वयं उपभोक्ता द्वारा किया गया है अथवा नहीं। वीडियो फुटेज तभी दी जा सकती है जब पुलिस में रिपोर्ट करवाई जाए ऐसा कोई नियम बैंक द्वारा पेश नहीं किया गया है। पुलिस हस्तक्षेप तभी होता है जब कोई आपराधिक कृत्य हो। आयोग ने विभिन्न न्यायिक दृष्टांतो के जरिए निर्णय में कहा कि वीडियो उपलब्ध नहीं करवाना सेवा में कमी है। आयोग ने समस्त तथ्यों, परिस्थितियों को देखते हुए बैंक की अपील अस्वीकार करते हुए जिला आयोग के निर्णय को उचित ठहराया। बैंक की ओर से अधिवक्ता ललित व्यास उपस्थित हुए।

ओंकारनाथ बनाम एसबीआई जैसलमेर :

एक अन्य प्रकरण में उपभोक्ता आयोग जोधपुर पीठ के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छवाहा , सदस्य लियाकत अली ने उपभोक्ता की अपील स्वीकार कर बैंक को 52000 की राशि मय ब्याज देने के आदेश पारित किए हैं। आयोग के समक्ष पोकरण जिला जैसलमेर निवासी ओंकारनाथ ने परिवाद प्रस्तुत कर बताया था कि कलेक्टर परिसर जैसलमेर के सीडीएम मशीन में अक्टूबर 2018 को 52000 जमा करवाई तथा ट्रांजेक्शंस भी सफल बताया लेकिन पर्ची नहीं निकली परिवादी ने बैंक में शिकायत भी की राशि भी एटीएम से वापस बाहर नहीं निकली, सीसीटीवी फुटेज भी परिवादी को नहीं दिखाएं राशि परिवादी के खाते में जमा नहीं होने पर जिला उपभोक्ता आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया।

बैंक की ओर से बताया गया कि एटीएम में 49900 तक की राशि ही जमा हो सकती है। परिवादी ने ज्यादा राशि जमा करवाने की कोशिश की जो मशीन में जमा नहीं हुए। मशीन द्वारा राशि वापस कर दी गई। रिकॉर्डिंग का डाटा भर जाने के कारण सीसीटीवी फुटेज तकनीकी खामी के कारण उपलब्ध नहीं हो पाई। जिला आयोग द्वारा परिवादी के परिवाद को अस्वीकार कर दिया गया।

जिला उपभोक्ता आयोग जैसलमेर के निर्णय के विरुद्ध उपभोक्ता ने राज्य उपभोक्ता आयोग जोधपुर पीठ के समक्ष अपील प्रस्तुत की। आयोग ने अपने निर्णय में कहा कि उपभोक्ता द्वारा मशीन में समव्यवहार सफल बताया गया , परंतु जमा पर्ची नहीं निकली। बैंक द्वारा यह जानकारी दी गई की 11 सेकंड में रकम बाहर फेंक दी गई थी। उपभोक्ता 5 मिनट तक इंतजार करता रहा परंतु, राशि वापस बाहर नहीं निकली ऐसी स्थिति में स्वीकृत रूप से यह नहीं माना जा सकता कि सीडीएम मशीन ने तत्काल रुपए लौटा दिए। बैंक इस संबंध मे कोई नियमावली बताने में भी असमर्थ रहा है कि सीडीएम मशीन के माध्यम से रुपए जमा नहीं करवाने जाने की स्थिति में कितने समय तक जमाकर्ता इंतजार करें ? बैंक द्वारा ना तो सीसीटीवी फुटेज पेश की गई और ना ही ओपनिंग, क्लोजिंग बैलेंस पेश किया गया जिससे यह सुनिश्चित हो सकता था कि रुपए डालते समय क्या शेष था और शाम के समय क्या बैलेंस रहा। बैंक द्वारा जे.पी रोल भी प्रस्तुत नहीं किया गया।

आयोग ने विभिन्न न्यायिक दृष्टांतो का उल्लेख करते हुए उपभोक्ता की अपील स्वीकार करते हुए 52000 प्रचलित दर के अनुसार मय ब्याज , वाद खर्च के रूप में 10000 देने के भी आदेश दिए। अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता विकास फोफलिया विपक्षी बैंक की ओर से अधिवक्ता ललित व्यास उपस्थित हुए।

(Udaipur Kiran) / सतीश

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