
कोलकाता, 28 अगस्त (Udaipur Kiran) । पश्चिम बंगाल विधानसभा का विशेष अधिवेशन आगामी एक से चार सितंबर तक चलेगा। तीन सितंबर को करम पूजा की सरकारी छुट्टी होने के कारण अधिवेशन केवल तीन दिनों के लिए निर्धारित है। राजनीतिक हलकों का मानना है कि यह अधिवेशन शासक और विपक्षी खेमों के बीच तीखी तकरार और महत्वपूर्ण प्रस्तावों के कारण खासा अहम साबित हो सकता है।
तृणमूल कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, अधिवेशन का मुख्य एजेंडा भाजपा शासित कुछ राज्यों में बंगाली भाषा बोलने वाले श्रमिकों और प्रवासी मजदूरों पर हो रहे कथित हमले होंगे। आरोप है कि बाहर काम करने गए बंगाली मजदूरों को “बांग्लादेशी” कहकर चिन्हित किया जा रहा है और उन पर मानसिक एवं शारीरिक अत्याचार किया जा रहा है। यहां तक कि उन्हें जबरन बांग्लादेश भेजने की घटनाओं के भी आरोप लगे हैं। इस मुद्दे पर विधानसभा में प्रस्ताव लाया जाएगा और तृणमूल चाहती है कि इस पर सर्वसम्मत निंदा प्रस्ताव पारित हो।
इसके साथ ही अधिवेशन में निर्वाचन आयोग द्वारा शुरू की गई स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया पर भी चर्चा हो सकती है। मतदाता सूची से नाम कटने और नए नाम जोड़ने जैसी प्रक्रियाओं पर राज्य सरकार अपना रुख स्पष्ट करेगी।
इस दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद चर्चा में हिस्सा लेंगी, जिनके वक्तव्य पर राजनीतिक हलकों की निगाहें टिकी होंगी। दूसरी ओर, विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी भी अधिवेशन में मौजूद रहकर तृणमूल सरकार पर हमला बोलने की तैयारी में हैं। माना जा रहा है कि सदन के भीतर शासक और विपक्ष आमने-सामने होंगे और टकराव और अधिक तीखा हो सकता है।
(Udaipur Kiran) / ओम पराशर
