
सोनीपत, 26 अगस्त (Udaipur Kiran) । जिला
सोनीपत में आशा वर्करों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। सीटू से जुड़ी आशा वर्कर्स यूनियन
की सह सचिव सुमन सैनी ने मंगलवार को कहा कि सात महीने से मानदेय न मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण
है। पांच अगस्त से सिविल सर्जन कार्यालय पर धरना जारी है, लेकिन अभी तक किसी ने उनकी
सुनवाई नहीं की।
उन्होंने
कहा कि सरकार बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का नारा देती है, लेकिन आशा वर्करों को समय पर मेहनताना
तक नहीं मिल रहा। आशा वर्करों को 6100 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है, जिसमें हिस्सा
केंद्र और राज्य सरकार दोनों का होता है। सात महीने से भुगतान न होने के कारण वर्करों
के घरों में हालात बिगड़ गए हैं। कई बच्चों के स्कूल से नाम काटे जा रहे हैं, बिजली
कनेक्शन कटने की नौबत आ गई है और दुकानदार उधार पर राशन देना बंद कर चुके हैं। किराए
के मकानों में रहने वाली आशाओं को मकान खाली करने की धमकी मिल रही है।
धरने
की अध्यक्षता मीना ने की और गन्नौर सीएचसी की सैकड़ों आशा वर्करों ने इसमें भाग लिया।
इस मौके पर यूनियन नेताओं मीना, रेखा, पिंकी, शीमा और सुमन ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग
का सारा बोझ आशा वर्करों पर डाला जा रहा है। रोज नए-नए काम थोपे जाते हैं, ऑनलाइन काम
का दबाव बनाया जाता है, लेकिन मेहनत की कीमत नहीं दी जाती। उन्होंने साफ कहा कि सरकार
काम तो लेना चाहती है, लेकिन काम का दाम नहीं देना चाहती, जिसे अब और बर्दाश्त नहीं किया
जाएगा।
(Udaipur Kiran) शर्मा परवाना
