

जयपुर, 30 नवंबर (Udaipur Kiran) । शहर में चल रहे एसटीपी में बनने वाली स्लज से किसानों की जमीन उपजाऊ हो रही है। स्लज के उपयोग से किसानों को उनके खेतों से ज्यादा उपज मिल रही है। शहर में विभिन्न स्थानों पर बने एसटीपी का संचालन जेडीए और नगर निगम द्वारा किया जा रहा है। जेडीए द्वारा करीब सात एसटीपी का संचालन किया जा रहा है। इसमें पांच एसटीपी द्रव्यवती नदी और एक गजाधरपुरा तथा दूसरा रलावता में है। इसके अलावा नगर निगम द्वारा देहलावास और ब्रह्मपुरी में एसटीपी का संचालन किया जा रहा है। खास बात यह है कि एसटीपी से निकल रहे इस खाद के लिए किसानों से कोई खास खर्चा नहीं करना पड़ रहा है।
जेडीए द्वारा द्रव्यवती पर पांच एसटीपी बनाए गए है इनमें चार एसटीपी चल रहे है । पिछले चार माह में इन एसटीपी से निकले वाला 60 फीसदी स्लज आमजन और किसानों के खेतों में पहुंच गया और इससे उनकी जमीन उपजाऊ हो रही है। 100 एमएलडी के एसटीपी से रोजाना 7 से 8 ट्रक स्लज निकलता है। द्रव्यवती नदी पर 170 एमएलडी के एसटीपी बने हुए है। द्रव्यवती नदी पर आमजन के लिए तीन पार्क बनाए गए है और साथ द्रव्यवती के दोनों और एक ग्रीन पट्टी भी विकसित की गई है। खाद के रुप में पार्को के साथ इन ग्रीन पट्टी में स्लज का उपयोग किया जा रहा है। पार्को सहित करीब 5 लाख वर्गमीटर एरिए में स्लज खाद के रुप में डाला जा रहा है।
जोबनेर स्थित एग्रीक्लचर यूनिवरसिटी ने भी अपने खेतों में खाद के रुप में स्लज का उपयोग किया है। इसके लिए जेडीए के एसटीपी से यूनिवरसिटी ने स्लज मंगवाया था। विशेष बात यह है कि इस खाद की गुणवत्ता को लेकर फिलहाल किसी भी प्रकार की कोई स्टडी नहीं की गई है। -उपयोग के बाद बचा शेष स्लज डालते सेवापुरा डिपो में शहर में चल रहे एसटीपी से रोजाना भारी मात्रा में स्लज निकलता है। किसानों और आमजन द्वारा ले जाने के बाद जो स्लज बचता है उसे सेवापुरा में बनाए गए निगम के डिपो में डाल दिया जाता है।
देहलावास एसटीपी के एक्सईएन उमंग राजवंशी ने बताया कि यहां से निकलने वाले स्लज को किसान अपने खेतों में खाद के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरक क्षमता बढ़ रही है। उनका कहना है कि यह एक उपयोगी और पर्यावरण हितैषी प्रक्रिया है, जिससे जैविक खाद को बढ़ावा मिल रहा है और रासायनिक खाद के उपयोग में कमी आ रही है। नगर निगम द्वारा इस प्रक्रिया की निगरानी की जा रही है, ताकि स्लज का सुरक्षित और सही तरीके से निस्तारण एवं उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।
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(Udaipur Kiran) / राजेश