सिरसा, 27 अगस्त (Udaipur Kiran) । सिरसा की सांसद कुमारी सैलजा ने कहा कि कहा कि केंद्र सरकार ने 130वां संविधान संशोधन बिल लाकर एक प्रकार से देश में अघोषित इमरजेंसी लागू की है और इसके सहारे सरकार लोकतंत्र की हत्या करना चाहती है। दूसरी ओर हरियाणा की भाजपा सरकार द्वारा 1984 के दंगा पीड़ितों के परिजनों को 11 साल बाद नौकरी देने की घोषणा केवल पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर की गई है यह एक राजनीतिक चाल है इसके सिवाय कुछ नहीं। सांसद सैलजा ने बुधवार को जारी प्रेस बयान में कहा कि 130वां संविधान संशोधन बिल के बाद अब 30 दिन की हिरासत किसी भी एजेंसी के दुरुपयोग से हासिल की जा सकती है। यह बिल लोकतंत्र के लिए खतरनाक बन सकता है।
सत्ता पक्ष इसका गलत इस्तेमाल कर सकता है। ये सरकार ताकत का इस्तेमाल करके जन विरोधी कानून लाने की कोशिश कर रही है, मनमानी तरीके से कानून ला रही है। ये भारतीय संविधान का काला अध्याय है। विपक्ष को बोलने ना देना अधिकारों का हनन है। ये विधेयक न्यायपालिका की स्वतंत्रता खत्म कर देगा। यह विधेयक संविधान के मूल ढांचे को रौंदता है। विधेयक देश के कानूनों के मौलिक सिद्धांतों के खिलाफ है। यह विधेयक न्याय के खिलाफ है।
हरियाणा सरकार द्वारा 1984 के दंगा पीड़ितों के परिजनों को नौकरी दिए जाने को कुमारी सैलजा ने एक राजनीतिक षड्यंत्र करार देते हुए कहा कि पिछले 11 सालों में भाजपा सरकार को सिख दंगा पीडि़तों की याद नहीं आई पर पंजाब में विधानसभा चुनाव को देखकर उसे सब कुछ याद आने लगा। भाजपा पंजाब में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है, जो उसके लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
भाजपा पंजाब में लोकसभा चुनावों में कोई सीट नहीं जीत पाई, जबकि 2022 के विधानसभा चुनावों में केवल दो सीटें जीतने में सफल रही। पंजाब में सैनी समुदाय के सदस्य हरियाणा की तुलना में अधिक संख्या में हैं। उनका होशियारपुर, नवांशहर (शहीद भगत सिंह नगर), जालंधर, रोपड़ (रूपनगर) और गुरदासपुर में 10 से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में प्रभाव है। ऐसे में भाजपा सरकार का यह फैसला पंजाब में बीजेपी की पैठ बढ़ाने की कोशिश है। पंजाब में सैनी समुदाय की अच्छी खासी आबादी है। बीजेपी उन्हें लुभाने की कोशिश कर रही है। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस फैसले का पंजाब के चुनावों पर क्या असर पड़ता है।
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(Udaipur Kiran) / Dinesh Chand Sharma
