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प्रधानमंत्री ओली का बीजिंग दौरा विवादों में घिरा, विशेषज्ञों ने दिया भ्रमण रद्द करने का सुझाव

चीनी राष्ट्रपति के साथ नेपाल के प्रधानमंत्री ओली

काठमांडू, 29 अगस्त (Udaipur Kiran) । बीजिंग के तियानमेन स्क्वायर में 3 सितंबर को जापान विरोधी युद्ध की 80वीं वर्षगांठ पर होने वाले समारोह में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का दौरा विवादों में घिर गया है। नेपाल में कूटनीतिक मामलों के विशेषज्ञों ने इस तरह के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सावधानी बरतने का आग्रह किया है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 26 देशों के राष्ट्रध्यक्ष और प्रधानमंत्री ओली बीजिंग में विजय दिवस परेड में शामिल होने वाले हैं। चीन के राष्ट्रपति सी जिनपिंग के निमंत्रण पर नेपाल के प्रधानमंत्री ओली भी इसमें सहभागी होने वाले हैं। तियांजिंग में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के बाद ओली बीजिंग में होने वाले विजय परेड समारोह में हिस्सा लेने के लिए बीजिंग की यात्रा करेंगे।

जापानियों के खिलाफ सैन्य परेड आयोजित करने की चीन की योजना के बारे में अपनी आपत्ति व्यक्त करते हुए टोक्यो पहले ही कई देशों को राजनयिक नोट भेज चुका है, जिसमें उनसे इसमें भाग लेने से बचने का आग्रह किया गया है। काठमांडू स्थित जापानी दूतावास ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को ई-मेल भेजते हुए इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होने को लेकर आग्रह भी किया है। जापानी दूतावास ने कहा है कि नेपाल के विकास में जापान हमेशा ही सहयोगी भूमिका में रहा है और जरूरत पड़ने पर हमेशा ही नेपाल के साथ खड़ा रहा है। हालांकि, नेपाल के विदेश मंत्रालय से इस पर जवाब मांगे जाने पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया व्यक्त नहीं की गई है।

नेपाल में प्रधानमंत्री ओली के बीजिंग भ्रमण के दौरान इस तरह के कार्यक्रम में सहभागी होने को लेकर विरोध होने लगा है। नेपाल में विदेश मामलों के जानकर पूर्व विदेश मंत्री और पूर्व राजदूतों ने प्रधानमंत्री ओली के इस निर्णय को अपरिपक्व कदम बताया है। इन्होंने प्रधानमंत्री ओली को इस तरह के कार्यक्रमों में नहीं जाने की सलाह दी है।

विदेश मामलों के जानकर अरूण सुवेदी ने कहा चूंकि जापान हमारा दीर्घकालिक सच्चा विकास भागीदार, बहुत बड़ा दाता है इसलिए प्रधानमंत्री को उसके खिलाफ होने वाले किसी भी कार्यक्रम में सहभागी होने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम में शिरकत करने से न सिर्फ जापान और नेपाल के कूटनीतिक संबंधों पर इसका असर पड़ेगा बल्कि जापान में रहने वाले लाखों नेपाली नागरिकों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

सत्तारूढ़ गठबंधन के नेता तथा पूर्व विदेश मंत्री एन पी साउद ने भी प्रधानमंत्री ओली के बीजिंग भ्रमण को लेकर अपनी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि नेपाल असंलग्न विदेश नीति पर अमल करता आया है और प्रधानमंत्री ओली को भी इसका ध्यान रखना चाहिए। एन पी साउद ने कहा कि नेपाल के सर्वांगीण विकास में भारत के बाद यदि सबसे बड़ा किसी देश का योगदान है तो वह जापान ही है। प्रधानमंत्री ओली के द्वारा जापान के खिलाफ चीन में आयोजित सैन्य परेड के सहभागी होने से जापान के साथ हमारे कूटनीतिक संबंधों पर दीर्घकालीन असर डाल सकता है।

पूर्व विदेश सचिव और राजदूत मधुरमन आचार्य ने बीजिंग कार्यक्रम में भाग लेने वाले राष्ट्रों की सूची में नेपाल की सहभागिता पर ही आश्चर्य व्यक्त किया। यह राजनयिक प्रथा, मानदंडों और परंपरा के खिलाफ है कि एक देश के खिलाफ विदेशी धरती पर दूसरे देश के खिलाफ खड़ा हो। आचार्य ने कहा कि प्रधानमंत्री ओली को अपने इस भ्रमण पर पुनर्विचार करना चाहिए और देश हित में बीजिंग के भ्रमण को रद्द करना चाहिए।

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(Udaipur Kiran) / पंकज दास

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