
हरिद्वार, 28 अगस्त (Udaipur Kiran) । पितृ पक्ष आगामी 7 सितम्बर से शुरू हो रहे हैं। पितृ पक्ष भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि से शुरू होते हैं और अमावस्या तिथि को समाप्त होते हैं।
मान्यता है कि श्राद्ध-तर्पण व पिण्डदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और पूर्वज प्रसन्न होकर परिजनों का कल्याण करते हैं। इस बार पितृपक्ष 7 सितंबर से शुरू होकर 21 सिंतबर तक चलेंगे।
पं. देवेन्द्र शुक्ल शास्त्री के मुताबिक जिस तिथि को जिस शख्स की मृत्यु होती है, पितृपक्ष में उसी तिथि को उसका श्राद्ध या तर्पण किया जाता है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को मृत्यु का दिन ज्ञात नहीं है तो अंतिम दिन सर्वपितृ अमावस्या के दिन उस का तर्पण करने का विधान है।
बताया कि श्राद्ध तर्पण हमेशा दोपहर में किया जाता है। किसी योग्य ब्राह्मण के द्वारा पिंड दान करवाना चाहिए। अपनी क्षमता के अनुसार उसे दान-दक्षिणा देनी चाहिए। इस दिन सच्चे मन से अपने पूर्वजों या पितरों को याद करना चाहिए और अगर भूलवश कोई गलती हुई हो तो उनसे क्षमा भी मांगनी चाहिए। ऐसा करने से पूर्वजों का आर्शीवाद मिलता है।
(Udaipur Kiran) / डॉ.रजनीकांत शुक्ला
