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हैरिटेज और ग्रेटर निगमों के विलय के खिलाफ जनहित याचिका

कोर्ट

जयपुर, 27 अगस्त (Udaipur Kiran) । शहर के हैरिटेज और ग्रेटर नगर निगमों को समाप्त कर एक नगर निगम गठित करने की अधिसूचना के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है। कांग्रेस के जिला अध्यक्ष आरआर तिवाडी की ओर पेश इस जनहित याचिका पर गुरुवार को मुख्य न्यायाधीश केआर श्रीराम और जस्टिस मनीष शर्मा की खंडपीठ सुनवाई करेगी।

याचिका में अधिवक्ता प्रेमचंद देवंदा और अधिवक्ता सुनील शर्मा ने बताया कि इस संबंध में स्वायत्त शासन विभाग की ओर से गत 27 मार्च को जारी की गई अधिसूचना पूरी तरह से मनमानी, असंवैधानिक और कानून के विपरीत है। दोनों निगम को समाप्त कर एक निगम के गठन के दौरान वार्ड को 250 से घटाकर 150 कर दिया जाएगा। याचिका में कहा गया कि हाल ही में निगम सीमा में शामिल 80 गांवों की करीब 1.75 लाख की आबादी को शामिल किया गया है। दोनों निगमों के एकीकरण से बढ़ी हुई आबादी के बावजूद नागरिकों का जनप्रतिनिधित्व कम हो जाएगा। याचिका में कहा गया कि शहर की मौजूदा आबादी करीब 45 लाख से अधिक है। वहीं बढ़ते शहरीकरण और क्षेत्रफल के हिसाब से मौजूदा वार्डो से सौ वार्ड कम करना शहर के विकास के लिहाज से उचित नहीं है। इससे न केवल शहर का विकास प्रभावित होगा, बल्कि प्रशासनिक ढांचा भी बिगड़ेगा और आमजन की अफसरों तक पहुंच भी कम होगी। याचिका में कहा गया कि शहर के विकास और आमजन की सुविधा के लिए साल 2019 में तत्कालीन सरकार ने जयपुर नगर निगम को विभाजित करते हुए दो निगम बनाए थे। वहीं हाईकोर्ट ने भी इसे न्यायोचित ठहराया था। अब इसके पुनः विलय से यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सिटी के लिए गठित विशेष संस्थानों जैसे हेरिटेज कमेटी, तकनीकी हेरिटेज समिति और हेरिटेज सेल का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। राज्य सरकार ने विलय का यह निर्णय आमजन की सलाह और कानूनी प्रावधानों का पालन किए बिना लिया है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि यह कदम पूरी तरह से राजनीतिक प्रेरणा और चुनावी लाभ के लिए उठाया गया है।

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(Udaipur Kiran)

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