
उज्जैन, 28 अगस्त (Udaipur Kiran) । आकाशीय घटनाओं के प्रेमियों के लिए इस बार सितम्बर का पहला सप्ताह बेहद खास होने जा रहा है। 7-8 सितम्बर 2025 की रात को वर्ष का अनोखा खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा, जब चन्द्रमा पृथ्वी की छाया में पूरी तरह समा जाएगा। यह पूर्ण चन्द्रग्रहण भारतीय समयानुसार रविवार रात 9 बजकर 56 मिनट 8 सेकंड से प्रारम्भ होकर सोमवार तडक़े 1 बजकर 26 मिनट 8 सेकंड तक रहेगा। इस दौरान चन्द्रमा पर गहरा लालिमा युक्त आभामंडल दृष्टिगोचर होगा।
ग्रहण की शुरुआत 7 सितम्बर की रात 9.56 बजे होगी और यह मध्य स्थिति 11.41 बजे पहुंचेगा। उस समय चन्द्रमा का 136.8 प्रतिशत भाग पृथ्वी की छाया से ढका हुआ दिखाई देगा। पूर्ण चन्द्रग्रहण की यह स्थिति लगभग डेढ़ घंटे तक बनी रहेगी। इसके बाद धीरे-धीरे चन्द्रमा छाया से मुक्त होना शुरू करेगा और 8 सितम्बर की रात 1.26 बजे ग्रहण समाप्त हो जाएगा। यह खगोलीय घटना भारत सहित अंटार्कटिका, पश्चिमी प्रशांत महासागर, ऑस्ट्रेलिया, एशिया, हिन्द महासागर और यूरोप के बड़े हिस्सों में देखी जा सकेगी। खास बात यह है कि इस बार पूरा चन्द्रग्रहण भारत से भी स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
वेधशाला में रहेगी विशेष व्यवस्था
शासकीय जीवाजी राव वेधशाला के अधीक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रकाश गुप्त ने बताया कि इस ग्रहण को दिखाने की विशेष तैयारी की जा रही है। यदि मौसम साफ रहा और आकाश में बादल नहीं छाए तो आमजन को टेलीस्कोप और प्रोजेक्टर की मदद से यह अद्भुत दृश्य देखने का अवसर मिलेगा।
क्या होता है चन्द्रग्रहण
वैज्ञानिकों के अनुसार चन्द्रग्रहण की स्थिति तब बनती है जब पृथ्वी, सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है। इस स्थिति में पृथ्वी की छाया चन्द्रमा पर पड़ती है। जब पूरा चन्द्रमा पृथ्वी की छाया में ढक जाता है, तो इसे पूर्ण चन्द्रग्रहण कहा जाता है। इस दौरान चन्द्रमा प्राय: गहरे लाल या ताम्रवर्णी रंग में दिखाई देता है।
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(Udaipur Kiran) / ललित ज्वेल
