
कानपुर, 30 नवम्बर (Udaipur Kiran) । जेसीआई द्वारा तैयार मंगल भवन गरीबों के उस सपने को सच करेगा जो हर मां बाप अपने बच्चों की शादी के लिये देखता है। शहर सबके योगदान से बनता है सब अपने अपने स्थान पर काम करते हैं तब शहर चमकता है। जेसीआई ने मंगलभवन के रूप में वह उदाहरण बना दिया जो पूरे देश के लिये है। 11 हजार रुपये पूरे देश में इस प्रकार की बिल्डिंग नहीं मिल सकती है। जेसीआई का काम अन्य संस्थाओं के लिये प्रेरणा बनेगा। वह भी इस प्रकार के सामाजिक सरोकार के काम कर सकती हैं क्योंकि हमारे पास अच्छे अफसर, लीडरशिप और सरकार है। यह बातें रविवार को विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कही।
बेनाझाबर रोड स्थित बीएनएसडी शिक्षा निकेतन के पास अप्रयुक्त पड़ी जमीन पर नगर निगम एवं महापौर प्रमिला पांडेय की पहल पर सामुदायिक भवन व बारातशाला की अवधारणा बनाई गई। महापौर ने संकल्प लिया कि सीएसआर से गरीबों का उत्थान किया जाएगा इसके लिये केआईजेसी आगे आया। इसे आकार देने की शुरुआत 11 सितंबर 2024 को नगर निगम और जेसीआई कानपुर इंडस्ट्रियल के बीच हुए एमओयू से हुई। इसके बाद 18 जनवरी 2025 को उत्तर प्रदेश के नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने वर्चुअल रूप से भूमि पूजन कर निर्माण प्रक्रिया को औपचारिक रूप दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस विचार सीएसआर केवल एक जिम्मेदारी नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण में साझेदारी का एक अनोखा अवसर है। जिसे साकार करते हुए कानपुर नगर ने सामाजिक उत्थान की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में नगर निगम और जेसीआई कानपुर इंडस्ट्रियल ने मिलकर अल्प आय एवं निर्बल वर्ग के हित में ‘केआईजेसी मंगल भवन’ के निर्माण का संकल्प पूरा किया है।
नगर निगम की भूमि और जेसीआई के 2.50 करोड़ के सीएसआर सहयोग से मंगल भवन का निर्माण रिकार्ड नौ महीनों में पूरा हुआ।
3,184 वर्गमीटर में विकसित मंगल भवन में 1,110 लोगों की क्षमता, बैंक्वेट हॉल, लॉन और पर्याप्त पार्किंग की आधुनिक सुविधा है।
महापौर प्रमिला पाण्डेय ने कहा कि जो सपना मैंनें गरीबों के लिये देखा था उसे जेसीआई ने पूरा कर दिखाया है, मैं अपने कार्यकाल में इसको इतना मजबूत कर जाउंगी कि मैं रहूं या न रहूं लेकिन मंगलभवन गरीबों की सेवा करता रहेगा। उन्होंने कहा किसी के मन में यह हो कि मंगल भवन को व्यापारी चलाएंगे। तो उन्हे मैं स्पष्ट करना चाहती हूं कि इसका संचालन और मालिकाना हक नगर निगम के पास है। उन्होंने कहा कि जैसे गरीबों के लिये मंगलभवन बना है वैसे ही मेरा एक और सपना है कि महिलाओ के लिए एक मार्केट बने जिसका मालिकाना हक सिर्फ महिलाओं के पास ही रहे। महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि मंगल भवन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सम्मानपूर्वक अपने मांगलिक कार्यक्रम आयोजित करने में मदद करेगा। यह परियोजना प्रधानमंत्री के सीएसआर विज़न और सीएम योगी की संवेदनशील नेतृत्व शैली का उत्कृष्ट उदाहरण है। हमारा प्रयास होगा कि मंगल भवन का रखरखाव और सेवा व्यवस्था सर्वोत्तम गुणवत्ता के साथ निरंतर जारी रहे। इसके रखरखाव का जिम्मा नगर निगम का रहेगा।’
नगर निगम ने निर्माण कार्य हेतु भूमि उपलब्ध कराई, जबकि जेसीआई कानपुर इंडस्ट्रियल के सदस्यों और शहर के प्रमुख उद्योगपतियों ने सीएसआर फंड के तहत दो करोड़ रुपये नगर निगम को दिए और 50 लाख रुपये अलग से लगाए। निगम की टेंडरिंग प्रक्रिया के बाद निर्माण कार्य कानपुर शटर कंपनी को आवंटित हुआ। जिसने रिकार्ड नौ महीने के समय में कार्य पूरा किया। अब मंगल भवन पूरी तरह तैयार है और इसे समाज के आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए उनके मांगलिक कार्यक्रमों के के लिए मात्र 11,000 रुपये में उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री के मुख्य सलाहकार अवनीश अवस्थी ने भी निर्माण के दौरान मंगल भवन का निरीक्षण किया था और सीएसआर को बढ़ावा देने के लिये किये गये इस काम के लिये नगर निगम, महापौर और जेसीआई की सराहना की थी।
मंगल भवन पर पूरा मालिकाना हक, रखरखाव एवं संरक्षण का अधिकार नगर निगम के पास रहेगा। यह भवन एक मिशाल के तौर पर तैयार हुआ है। इसके लिए एक समिति बनाई जाएगी, जिसमें महापौर, नगर आयुक्त, जेसीआई के वर्तमान एवं पूर्व अध्यक्ष शामिल होंगे। साथ ही जेसीआई के दो सदस्य निगरानी समिति में रहेंगे, जो कि यह देखेंगें कि भवन का उपयोग सिर्फ गरीबों के लिये हो रहा है कि नहीं कोई दुरुपयोग तो नहीं हो रहा है।
जेसीआई के पूर्व अध्यक्ष आकाश गोयनका ने कहा कि इस पूरे प्रोजेक्ट में महापौर प्रमिला पांडे की दूरदर्शिता, दृढ़ निश्चय और जनहित के प्रति उनकी प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण रही। उनके सतत प्रयासों, व्यक्तिगत निगरानी और सकारात्मक नेतृत्व ने ही इस परियोजना को रिकॉर्ड समय में मूर्तरूप दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी संवेदनशीलता ने ‘मंगल भवन’ को केवल एक संरचना नहीं बल्कि गरीब परिवारों की गरिमा से जुड़ी एक पहल के रूप में विकसित किया है।
केआईजेसी मंगलभवन की बनावट एक नजर में: केआईजेसी मंगल भवन कुल 3,184.02 वर्गमीटर (34,272 वर्गफीट) क्षेत्रफल में विकसित है, जिसमें 961.54 वर्गमीटर (10,350 वर्गफीट) का निर्मित क्षेत्र शामिल है। ग्राउंड फ्लोर 644.19 वर्गमीटर और प्रथम तल 317.36 वर्गमीटर में निर्मित है। परिसर में 849.71 वर्गमीटर (9,146 वर्गफीट) का विशाल लॉन उपलब्ध है, जिसकी क्षमता 750 व्यक्तियों की है। इसके अलावा 423.29 वर्गमीटर (4,556.19 वर्गफीट) का सुसज्जित बैंक्वेट हॉल 300 व्यक्तियों की क्षमता के साथ मौजूद है। प्रथम तल पर 66.75 वर्गमीटर (718.50 वर्गफीट) का एक छोटा मल्टीपरपज़ हॉल भी है, जिसकी क्षमता 60 व्यक्तियों की है। सभी स्थानों की संयुक्त क्षमता 1,110 लोगों की है। मंगल भवन में दो ऑफिस रूम, एक किचन, दो गेस्ट रूम तथा परिसर के भीतर 42 कारों और 300 बाइकों की पार्किंग की सुविधा भी उपलब्ध है।
(Udaipur Kiran) / रोहित कश्यप